



कोटा। कोटा के चर्चित चंद्रेसल मठ महंत देवानंद हत्याकांड में पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए हत्या की साजिश रचने वाले मुख्य आरोपी सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि करीब 1100 वर्ष पुराने चंद्रेसल मठ की 750 बीघा भूमि, करोड़ों रुपये की संपत्ति और ट्रस्ट के नियंत्रण को लेकर चल रहे विवाद के कारण इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया गया।
सिटी पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम ने गुरुवार को बताया कि मामले में विरोधी गुट के कथित अध्यक्ष एवं अधिवक्ता संतोष कुमार राय तथा वारदात में शामिल पुष्पेंद्र सिंह उर्फ प्रिंस को गिरफ्तार किया गया है। वहीं आदित्य वर्मा, अंकित बैरवा और अन्य सहयोगियों की तलाश जारी है। पुलिस के अनुसार 5 जून की रात बोरखेड़ा थाना क्षेत्र स्थित चंद्रेसल मठ में महंत देवानंद पर चाकुओं से हमला कर उनकी निर्मम हत्या कर दी गई थी।
घटना की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुभाषचंद मिश्रा के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। साइबर सेल, डीएसटी और विभिन्न थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और मानव खुफिया तंत्र के आधार पर जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि संतोष कुमार राय ने आदित्य वर्मा को एक लाख रुपये की सुपारी देकर महंत की हत्या कराने की योजना बनाई थी। इसके बाद आदित्य ने अपने साथियों पुष्पेंद्र सिंह उर्फ प्रिंस, अंकित बैरवा और एक अन्य युवक को इस साजिश में शामिल किया।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने एक जून को मठ की रेकी की थी और महंत की दिनचर्या, आने-जाने के समय और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी जुटाई थी। संदेह से बचने के लिए मुख्य आरोपी संतोष राय ने वारदात से पहले जयपुर के एक अस्पताल में पैर की सर्जरी के बहाने भर्ती होकर स्वयं को घटनास्थल से दूर दिखाने का प्रयास किया।
जांच में सामने आया कि 5 जून की रात आरोपी दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर मठ पहुंचे। उन्होंने पहले नंदनवन के कमरे को बाहर से बंद किया और इसके बाद महंत देवानंद के कमरे में घुसकर उन पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद जब महंत जान बचाने के लिए बाहर निकले तो आरोपियों ने उन पर चाकुओं से लगातार वार किए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस का कहना है कि चंद्रेसल मठ की विशाल भूमि और करोड़ों रुपये की संपत्ति को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। महंत देवानंद नई कार्यकारिणी को कानूनी मान्यता दिलाने के प्रयास कर रहे थे, जबकि पुराने गुट की ओर से इसका विरोध किया जा रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि संतोष राय ट्रस्ट के संचालन और प्रभाव पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता था तथा महंत देवानंद की बढ़ती सक्रियता को अपने हितों के लिए खतरा मान रहा था। इसी कारण सुनियोजित तरीके से हत्या की साजिश रची गई।
पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है और मामले में आगे भी कई महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।