



जयपुर। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के संयोजक एवं हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान सरकार और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर तीखा हमला बोलते हुए मंत्रियों के कार्यों की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार जवाबदेही और पारदर्शिता की बात करती है तो मंत्रियों के कामकाज की भी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।
बेनीवाल ने जलदाय मंत्री कन्हैया लाल चौधरी, उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, मंत्री हीरालाल नागर और के.के. बिश्नोई का नाम लेते हुए कहा कि सरकार को सभी मामलों में समान मानदंड अपनाने चाहिए और किसी भी स्तर पर पक्षपात नहीं होना चाहिए।
राजस्थान की राजनीति के चर्चित मानेसर राजनीतिक घटनाक्रम 2020 का उल्लेख करते हुए बेनीवाल ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2020 के दौरान कांग्रेस अपनी सरकार बचाने के लिए राजनीतिक जोड़तोड़ में लगी हुई थी और उस समय बड़े पैमाने पर विधायकों की खरीद-फरोख्त हुई थी। उन्होंने दावा किया कि कई विधायक उस दौर में पाला बदलकर तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थन में चले गए थे।
बेनीवाल ने कहा कि उस समय उनकी पार्टी के तीन विधायक थे और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ थी। उनके अनुसार तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों में सरकार बचाने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए गए, जिसके परिणामस्वरूप कई राजनीतिक घटनाक्रम सामने आए।
इस दौरान बेनीवाल ने अपनी प्रस्तावित भरतपुर जनसभा को लेकर भी महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि 21 जून को भरतपुर में प्रस्तावित आरएलपी की रैली फिलहाल स्थगित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि उसी अवधि में आयोजित होने वाली मेडिकल प्रवेश परीक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है, ताकि विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
उन्होंने कहा कि पार्टी जल्द ही रैली की नई तिथि घोषित करेगी। बेनीवाल के अनुसार भरतपुर में होने वाली जनसभा में प्रदेश के विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा और आमजन से जुड़े विषयों पर पार्टी अपनी आवाज बुलंद करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बेनीवाल के ताजा बयान ऐसे समय में आए हैं जब राजस्थान की राजनीति में जवाबदेही, प्रशासनिक पारदर्शिता और मंत्रियों के कार्यों को लेकर विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। ऐसे में उनके बयान को राज्य की राजनीति में नए राजनीतिक हमले के रूप में देखा जा रहा है