



टोंक। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) ने प्रदेश सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि कर्मचारियों की लंबित मांगों का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो पूरे राजस्थान में व्यापक आंदोलन किया जाएगा। कर्मचारियों की विभिन्न मांगों के समर्थन में निकाली जा रही "कर्मचारी जागृति यात्रा" बुधवार को टोंक पहुंची, जहां कर्मचारियों और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने इसका जोरदार स्वागत किया।
महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह राठौड़ के नेतृत्व में निकाली जा रही यह यात्रा सवाई माधोपुर से टोंक पहुंची। यात्रा में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की भागीदारी देखने को मिली। कर्मचारियों ने अपनी वर्षों से लंबित मांगों के समर्थन में एकजुटता प्रदर्शित करते हुए सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने का संकल्प दोहराया।
सभा को संबोधित करते हुए गजेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि कर्मचारियों की सहनशीलता और सकारात्मक रवैये को सरकार कमजोरी नहीं समझे। उन्होंने कर्मचारियों को संगठित रहने का संदेश देते हुए कहा कि यदि अपनी मांगों को मनवाना है तो संगठन की शक्ति को मजबूत करना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारी एकजुट होकर आंदोलन के लिए खड़े हो गए तो सरकार के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो सकती है।
उन्होंने महासंघ की 25 सूत्रीय मांगों का उल्लेख करते हुए कहा कि आरजीएचएस के निजीकरण पर रोक लगाई जाए, सरेंडर लीव का भुगतान जारी किया जाए, 8, 16, 24 और 32 वर्ष के चयनित वेतनमान का लाभ दिया जाए तथा लंबित बजट घोषणाओं को लागू किया जाए। इसके अलावा संविदा एवं ठेका कर्मियों को नियमित करने, पदोन्नति में दो वर्ष की छूट बिना शर्त लागू करने और वाहन चालकों व तकनीकी कर्मचारियों जैसे आइसोलेट संवर्गों को पदोन्नति पर आर्थिक लाभ देने की भी मांग की गई।
राठौड़ ने कहा कि कर्मचारियों के हितों के लिए शुरू किया गया यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं हो जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय से कर्मचारियों की जायज मांगों की उपेक्षा की जा रही है, जिसे अब स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कर्मचारी जागृति यात्रा में महासंघ के महामंत्री मोहन लाल शर्मा, उपाध्यक्ष अजयवीर सिंह, शेर सिंह यादव, डॉ. रणजीत मीना सहित विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।
टोंक जिलाध्यक्ष सत्यनारायण मीणा ने यात्रा को मिले समर्थन के लिए कर्मचारियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि टोंक जिले के कर्मचारी अपने अधिकारों की लड़ाई में पूरी मजबूती के साथ महासंघ के साथ खड़े हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा।