



जयपुर। राजस्थान की राजनीति में अपनी सादगी, संगठनात्मक कार्यशैली और जमीनी जुड़ाव के लिए पहचाने जाने वाले भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशी सतीश पूनिया ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से एक अनूठी सामाजिक अपील की है। राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों पर एक वीडियो संदेश जारी कर स्वागत-सत्कार की परंपरागत शैली में बदलाव का आग्रह किया है।
वीडियो संदेश में सतीश पूनिया ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे उनके स्वागत में फूलों की बड़ी मालाएं, महंगे उपहार, साफे और शॉल जैसी वस्तुओं पर अनावश्यक खर्च न करें। उन्होंने कहा कि यदि कोई उनका सम्मान करना चाहता है तो केवल एक फूल भेंट कर सकता है, जो उनके लिए पर्याप्त होगा। पूनिया ने इसे सादगी और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए कहा कि बचाई गई राशि का उपयोग समाज के जरूरतमंद वर्गों और मूक पशुओं के कल्याण में किया जाना चाहिए।
अपने सोशल मीडिया संदेश में उन्होंने लिखा कि उन्हें विश्वास है कि कार्यकर्ता और समर्थक उनकी इस विशेष अपील पर गंभीरता से विचार करेंगे और सहयोग प्रदान करेंगे। उनके इस संदेश के सामने आने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच इसकी व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।
सतीश पूनिया ने पुस्तकों को सर्वोत्तम उपहार बताते हुए कहा कि यदि कोई उन्हें कुछ भेंट करना चाहता है तो महंगे उपहारों के स्थान पर उपयोगी और ज्ञानवर्धक पुस्तकें दे सकता है। उन्होंने कहा कि पुस्तकें समाज को दिशा देने का माध्यम होती हैं और किसी भी भौतिक उपहार की तुलना में अधिक मूल्यवान हैं।
गौसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए पूनिया ने समर्थकों से आग्रह किया कि यदि वे उनके सम्मान में कोई राशि खर्च करना चाहते हैं तो उसे किसी पंजीकृत गौशाला को दान कर दें। उन्होंने कहा कि गौशालाओं को आर्थिक सहयोग देकर उसकी रसीद सौंपना उनके लिए किसी भी उपहार से अधिक खुशी देने वाला कार्य होगा।
उन्होंने अपनी अपील को सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हुए कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों की सहायता, अनाथालयों में रहने वाले बच्चों के लिए सहयोग और आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी विद्यार्थियों की शिक्षा में मदद जैसे कार्य ही उनके लिए वास्तविक सम्मान होंगे। पूनिया ने कहा कि यदि कोई कार्यकर्ता किसी जरूरतमंद छात्र को पढ़ाई जारी रखने में सहायता करता है या किसी अनाथ आश्रम के बच्चों के लिए योगदान देता है, तो वह उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान माना जाएगा।
राजनीतिक कार्यक्रमों में अक्सर होने वाली भव्य स्वागत परंपराओं के बीच सतीश पूनिया की यह पहल सामाजिक उत्तरदायित्व, सादगी और जनसेवा का संदेश देने वाली मानी जा रही है। उनके इस संदेश को भाजपा कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों द्वारा सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है।