



जयपुर। राजस्थान कांग्रेस की राजनीति में एक बार फिर मानेसर प्रकरण को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पूर्व ओएसडी रह चुके लोकेश शर्मा ने गहलोत के हालिया बयानों पर तीखा पलटवार करते हुए उन्हें "सबसे बड़ा षड्यंत्रकारी" बताया है। लोकेश शर्मा ने कहा कि सरकार गिराने की साजिश और मानेसर प्रकरण से जुड़े आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत हैं और आज तक इनके समर्थन में कोई ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं।
जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए लोकेश शर्मा ने कहा कि अशोक गहलोत की हालिया बयानबाजी उनकी राजनीतिक हताशा को दर्शाती है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेतृत्व जल्द ही सचिन पायलट को बड़ी जिम्मेदारी देने जा रहा है और इसी कारण गहलोत लगातार ऐसे बयान देकर माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। शर्मा ने कहा कि सचिन पायलट के प्रति राजनीतिक विरोध के चलते गहलोत बार-बार पुराने मुद्दों को उठाकर उन्हें जीवित रखने का प्रयास कर रहे हैं।
लोकेश शर्मा ने कहा कि यदि सरकार गिराने की कथित साजिश के संबंध में कोई सबूत मौजूद हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि प्रमाण वास्तव में उपलब्ध थे तो उन्हें जांच एजेंसियों और अदालत के समक्ष क्यों प्रस्तुत नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से केवल राजनीतिक बयान दिए जा रहे हैं, लेकिन आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सामग्री सामने नहीं लाई गई।
उन्होंने आगे कहा कि संबंधित मामलों में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और न्यायालय में प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर कुछ व्यक्तियों को राहत भी मिल चुकी है। शर्मा का दावा है कि अदालत में प्रस्तुत जांच रिपोर्टों में सरकार गिराने की साजिश संबंधी आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए गए थे। इसी आधार पर उन्होंने मानेसर प्रकरण को बार-बार उठाए जाने पर सवाल खड़े किए।
लोकेश शर्मा ने यह भी कहा कि कांग्रेस संगठन में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच कुछ नेताओं की बेचैनी बढ़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन और नई जिम्मेदारियों की संभावनाओं के कारण इस प्रकार की बयानबाजी सामने आ रही है। हालांकि गहलोत की ओर से इन आरोपों पर कोई ताजा प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
गौरतलब है कि वर्ष 2020 के राजनीतिक घटनाक्रम और मानेसर प्रकरण को लेकर कांग्रेस के भीतर समय-समय पर बयानबाजी होती रही है। एक बार फिर इस मुद्दे के उभरने से राजस्थान कांग्रेस की आंतरिक राजनीति चर्चा का विषय बन गई है।