



भाजपा किसान मोर्चा की ओर से जयपुर में आयोजित जैविक खेती आधारित किसान सम्मेलन अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। सम्मेलन में राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत की मौजूदगी तथा कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा की अनुपस्थिति को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसे लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भाजपा और राज्य सरकार को घेरा है।
डोटासरा ने अपने बयान में कहा कि किसी राजनीतिक दल के कार्यक्रम में दो राज्यपालों की उपस्थिति संवैधानिक मर्यादाओं और निष्पक्षता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का पद संविधान के तहत निष्पक्ष माना जाता है और ऐसे पदों का राजनीतिक कार्यक्रमों में उपयोग लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा संवैधानिक पदों का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने किसान सम्मेलन से कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा की गैरमौजूदगी को भी मुद्दा बनाया। उन्होंने सवाल किया कि यदि कार्यक्रम किसानों के हितों और कृषि सुधारों को लेकर आयोजित किया गया था तो राज्य के कृषि मंत्री उसमें शामिल क्यों नहीं हुए। डोटासरा ने यह भी पूछा कि क्या हाल के घटनाक्रमों और कथित भ्रष्टाचार संबंधी चर्चाओं के बाद सरकार ने कृषि मंत्री से दूरी बना ली है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस संबंध में स्पष्ट स्थिति सामने रखनी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि जयपुर में आयोजित भाजपा किसान मोर्चा के इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भाजपा के वरिष्ठ नेता और विभिन्न जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में नवाचारों को प्रोत्साहित करने पर चर्चा की गई। हालांकि सम्मेलन के दौरान कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा की अनुपस्थिति राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी रही।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसान सम्मेलन जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कृषि मंत्री की गैरहाजिरी को विपक्ष मुद्दा बनाने का प्रयास कर रहा है। वहीं भाजपा की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।