Friday, 12 June 2026

मानसून से पहले राजस्थान सरकार अलर्ट, 15 जून से 24×7 सक्रिय रहेंगे नियंत्रण कक्ष: किरोड़ीलाल मीणा


मानसून से पहले राजस्थान सरकार अलर्ट, 15 जून से 24×7 सक्रिय रहेंगे नियंत्रण कक्ष: किरोड़ीलाल मीणा

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राजस्थान में आगामी मानसून को देखते हुए राज्य सरकार ने बाढ़, अतिवृष्टि, जलभराव और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने सभी विभागों को समन्वित कार्ययोजना के साथ तैयार रहने के निर्देश देते हुए कहा कि जनसुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि संभावित आपदाओं की स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए अभी से सभी संसाधनों की उपलब्धता और व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाए।

शासन सचिवालय में आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पिछले वर्षों के अनुभवों के आधार पर बाढ़ और जलभराव संभावित क्षेत्रों की पुनः पहचान कर वहां आवश्यक संसाधनों की अग्रिम व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन में पूर्व तैयारी, समय पर चेतावनी, त्वरित प्रतिक्रिया और विभागों के बीच बेहतर समन्वय सबसे महत्वपूर्ण तत्व हैं। इसी के तहत 15 जून से राज्य और जिला स्तर पर स्थापित सभी आपदा नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे सक्रिय रहेंगे।

बैठक में मौसम संबंधी चेतावनियों और सूचनाओं के त्वरित प्रसार पर भी विशेष जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की वेधशालाओं से प्राप्त मौसम पूर्वानुमानों और अलर्ट को सोशल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे माध्यमों से आमजन तक तत्काल पहुंचाया जाए। अधिकारियों को ‘सचेत’ ऐप डाउनलोड कर मौसम संबंधी चेतावनियों से लगातार अपडेट रहने के निर्देश भी दिए गए।

किरोड़ी लाल मीणा ने जल संसाधन विभाग को सभी बांधों, जलाशयों और एनीकटों की तकनीकी जांच, मरम्मत और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों के लिए प्रभावी अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित करने तथा बाढ़ संभावित क्षेत्रों में जोखिम मूल्यांकन और सुरक्षित निकासी की तैयारी रखने के निर्देश दिए। नगरीय विकास विभाग, स्थानीय निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं को नालों की सफाई, ड्रेनेज व्यवस्था दुरुस्त करने और जलभराव वाले क्षेत्रों में पम्पसेट, जनरेटर और अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध रखने को कहा गया।

राज्य सरकार ने बाढ़ प्रबंधन के लिए त्रिस्तरीय रणनीति अपनाने का निर्णय लिया है, जिसमें बाढ़ पूर्व तैयारी, बाढ़ के दौरान राहत एवं बचाव कार्य तथा बाढ़ के बाद पुनर्वास और पुनर्स्थापन की कार्ययोजना शामिल होगी। जिला कलेक्टरों को राहत शिविरों, निकासी मार्गों, सुरक्षित आश्रय स्थलों और खोज एवं बचाव दलों की तैयारियों की समीक्षा करने तथा मॉक ड्रिल आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, वायुसेना, पुलिस, सिविल डिफेंस और होमगार्ड को भी हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए। विशेष बचाव दलों की तैनाती, नौकाओं, लाइफ जैकेट, रस्सियों और अन्य राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। चिकित्सा विभाग को 24×7 नियंत्रण कक्ष संचालित करने, पर्याप्त दवाइयों का भंडारण रखने और मोबाइल मेडिकल टीमों को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं पेयजल, बिजली, सड़क, खाद्यान्न आपूर्ति और पशुपालन से जुड़े विभागों को भी आपातकालीन कार्ययोजनाएं तैयार रखने के लिए कहा गया है।

आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा राज्य मंत्री ओटाराम देवासी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि पूर्व तैयारी और समयबद्ध चेतावनी के जरिए जनहानि एवं संपत्ति के नुकसान को न्यूनतम करना है। उन्होंने कहा कि सभी विभाग समन्वित रूप से कार्य करते हुए आमजन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

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