Monday, 27 July 2026

जयपुर के पांच शिव मंदिरों में शुरू हुआ ‘शिवार्पणम्’ अभियान, बेलपत्र और फूलों से बनेगी जैविक खाद


जयपुर के पांच शिव मंदिरों में शुरू हुआ ‘शिवार्पणम्’ अभियान, बेलपत्र और फूलों से बनेगी जैविक खाद

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जयपुर। सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव को अर्पित किए जाने वाले बेलपत्र, फूल और अन्य पूजा सामग्री अब कचरे में नहीं जाएगी। नगर निगम जयपुर ने धार्मिक आस्था, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ते हुए ‘शिवार्पणम्’ नाम से अनूठी पहल शुरू की है। पहले चरण में यह अभियान शहर के पांच प्रमुख शिव मंदिरों में संचालित किया जाएगा।

इस पहल के तहत मंदिरों से भगवान शिव को अर्पित जैविक निर्माल्य—बेलपत्र, फूल और अन्य जैविक पूजा सामग्री—को अलग से एकत्र किया जाएगा। इसके बाद वैज्ञानिक प्रक्रिया से उसे उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद में परिवर्तित किया जाएगा। करीब 30 दिन में तैयार होने वाली खाद को विशेष पैकेट में भरकर ‘शिवार्पणम् प्रसाद’ के रूप में श्रद्धालुओं और आमजन को वितरित किया जाएगा।

अभियान की शुरुआत ताड़केश्वर महादेव मंदिर, झारखंड महादेव मंदिर, जंगलेश्वर महादेव मंदिर, चमकारेश्वर महादेव मंदिर और रोजगारेश्वर महादेव मंदिर से की जा रही है। सावन के दौरान प्रत्येक सोमवार नगर निगम के इलेक्ट्रिक हॉपर वाहन चयनित मंदिरों से पूजा के बाद एकत्र होने वाले जैविक निर्माल्य का संग्रह करेंगे।

एकत्रित बेलपत्र, फूल और अन्य सामग्री को निकटवर्ती उद्यान में स्थापित श्रेडर मशीन की सहायता से छोटे टुकड़ों में परिवर्तित किया जाएगा। इसके बाद इस सामग्री को विशेष कम्पोस्ट पिट में डालकर करीब 30 दिनों तक वैज्ञानिक प्रक्रिया से खाद तैयार की जाएगी।

नगर निगम आयुक्त ओम कसेरा ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल मंदिर परिसरों में स्वच्छता बनाए रखना नहीं है, बल्कि धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए जैविक कचरे का उचित प्रबंधन करना और सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा को बढ़ावा देना भी है।

उन्होंने कहा कि भगवान शिव को श्रद्धापूर्वक अर्पित किया गया प्रत्येक बेलपत्र और पुष्प आस्था का प्रतीक है। ऐसे पवित्र निर्माल्य का स्थान कचरे के ढेर में नहीं, बल्कि पर्यावरण और धरती की सेवा में होना चाहिए। ‘शिवार्पणम्’ के माध्यम से पूजा सामग्री को सम्मानजनक और उपयोगी स्वरूप प्रदान किया जाएगा।

इस अभियान से मंदिरों के आसपास निकलने वाले जैविक कचरे की मात्रा कम होगी और श्रद्धालुओं में कचरा पृथक्करण तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। जैविक खाद को प्रसाद के रूप में वितरित करने से लोग इसका उपयोग घरों, उद्यानों और पौधों में कर सकेंगे।

नगर निगम की यह पहल धार्मिक आस्था को पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जोड़ने वाला अभिनव प्रयास है। सफल परिणाम मिलने पर इस मॉडल का विस्तार शहर के अन्य धार्मिक स्थलों तक भी किया जा सकता है।

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