



जयपुर। जयपुर में 31 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक तीन दिवसीय ‘कॉमनवेल्थ पीस मीडिएशन कॉन्फ्रेंस-2026’ का आयोजन किया जाएगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत 31 जुलाई को इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। सम्मेलन का केंद्रीय विषय ‘पीस मीडिएशन एंड द रूल ऑफ लॉ’ रखा गया है।
सम्मेलन में कॉमनवेल्थ देशों के न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता, मध्यस्थ, विधि विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और प्रतिनिधि भाग लेंगे। आयोजन से जुड़ी जानकारी के अनुसार, इसमें 52 कॉमनवेल्थ देशों के प्रतिनिधियों की सहभागिता प्रस्तावित है।
उद्घाटन समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के साथ जाम्बिया की कोर्ट ऑफ अपील की न्यायाधीश जस्टिस आभा नायर पटेल, राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित देश-विदेश की प्रमुख न्यायिक हस्तियां उपस्थित रहेंगी।
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सहभागिता में आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता को प्रभावी और व्यावहारिक माध्यम के रूप में बढ़ावा देना है। सम्मेलन के दौरान मध्यस्थता, शांतिपूर्ण विवाद समाधान और कानून के शासन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे। आधिकारिक आयोजन विवरण के अनुसार, सम्मेलन परिवार से लेकर वैश्विक स्तर तक उत्पन्न होने वाले विवादों के शांतिपूर्ण और रचनात्मक समाधान में मध्यस्थता की भूमिका पर केंद्रित रहेगा।
रालसा के सदस्य सचिव हरिओम अत्री ने बताया कि किसी विवाद के न्यायालय में पहुंचने के बाद उसके अंतिम निस्तारण में कई बार वर्षों का समय लग जाता है। वहीं, मध्यस्थता के माध्यम से पक्षकार आपसी बातचीत और सहमति से कुछ महीनों में ही विवाद का समाधान प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि मध्यस्थता में किसी एक पक्ष की जीत और दूसरे पक्ष की हार के बजाय दोनों पक्षों को स्वीकार्य समाधान तलाशने का प्रयास किया जाता है। इससे न केवल पक्षकारों के समय और धन की बचत होती है, बल्कि उनके आपसी संबंध भी सुरक्षित रहते हैं।
मध्यस्थता को बढ़ावा मिलने से न्यायालयों में लंबित मुकदमों का भार कम करने में भी सहायता मिल सकती है। विशेष रूप से पारिवारिक, व्यावसायिक, संपत्ति और अन्य नागरिक विवादों में मध्यस्थता त्वरित, गोपनीय और कम खर्चीले समाधान का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान मध्यस्थता की वर्तमान व्यवस्था, विभिन्न कॉमनवेल्थ देशों में अपनाई जा रही श्रेष्ठ प्रक्रियाओं, मध्यस्थों के प्रशिक्षण और शांतिपूर्ण विवाद समाधान के लिए संस्थागत तंत्र को मजबूत बनाने पर चर्चा की जाएगी।
इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के माध्यम से जयपुर विश्वभर के न्यायविदों, मध्यस्थों और विधि विशेषज्ञों के बीच संवाद का प्रमुख केंद्र बनेगा। सम्मेलन से भारत में मध्यस्थता संस्कृति को बढ़ावा मिलने तथा विवादों के शीघ्र और सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण सुझाव सामने आने की उम्मीद है।