Tuesday, 09 June 2026

पंचायत और निकाय चुनाव: हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में राज्य सरकार, सितंबर तक समय मांगने की संभावना


पंचायत और निकाय चुनाव: हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में राज्य सरकार, सितंबर तक समय मांगने की संभावना

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जयपुर। राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा 31 जुलाई 2026 तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए जाने के बाद अब राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार सरकार जल्द ही विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर कर हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दे सकती है और चुनाव कराने के लिए अतिरिक्त समय की मांग कर सकती है।

स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने भी इस संबंध में संकेत देते हुए कहा है कि सरकार कानूनी पहलुओं पर विचार-विमर्श कर रही है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करने को लेकर मंथन जारी है और सभी पहलुओं का परीक्षण किया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जबकि चुनाव से जुड़ी व्यवस्थाएं और प्रक्रियाएं राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती हैं।

गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 22 मई को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की प्रक्रिया 31 जुलाई 2026 तक हर हाल में पूरी की जाए। अदालत के इस आदेश के बाद चुनावी तैयारियों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन अब तक जमीनी स्तर पर चुनाव संबंधी गतिविधियों में अपेक्षित गति दिखाई नहीं दी है। हाईकोर्ट के आदेश के कई दिन बीत जाने के बावजूद राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जिला निर्वाचन अधिकारियों के लिए कोई नया विस्तृत दिशा-निर्देश या चुनाव कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है।

यह पहली बार नहीं है जब चुनावों को लेकर अदालत ने समयसीमा तय की हो। इससे पहले भी एक न्यायिक आदेश में राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन निर्धारित समय में चुनाव नहीं हो सके थे। ऐसे में अब हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद सरकार की रणनीति पर सबकी नजर बनी हुई है।

चुनाव प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण से जुड़ी रिपोर्ट को माना जा रहा है। पंचायतों और नगरीय निकायों में सीटों के आरक्षण का अंतिम निर्धारण राज्य ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर निर्भर है। जब तक आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंपता, तब तक वार्ड पुनर्गठन और आरक्षण का नया खाका तैयार करना संभव नहीं माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार राज्य ओबीसी आयोग आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। अभी भी प्रदेश की 400 से अधिक ग्राम पंचायतों और अन्य स्थानीय निकाय क्षेत्रों से आवश्यक जनसांख्यिकीय आंकड़े प्राप्त होने बाकी हैं। इन आंकड़ों के आधार पर आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसके बाद रोटेशन प्रणाली के अनुसार विभिन्न सीटों पर आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट से सितंबर 2026 तक का अतिरिक्त समय मांग सकती है, ताकि आरक्षण प्रक्रिया, वार्ड पुनर्गठन और अन्य आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा कर निष्पक्ष और व्यवस्थित चुनाव कराए जा सकें। हालांकि अंतिम निर्णय सरकार और न्यायालय की आगामी कार्रवाई पर निर्भर करेगा।

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