Saturday, 06 June 2026

फर्जी मेडिकल रजिस्ट्रेशन रैकेट में आरएमसी कर्मचारी गिरफ्तार, प्रति फाइल 2 से 5 लाख रुपए लेने का आरोप


फर्जी मेडिकल रजिस्ट्रेशन रैकेट में आरएमसी कर्मचारी गिरफ्तार, प्रति फाइल 2 से 5 लाख रुपए लेने का आरोप

ख़बर सुनिए:

0:00
0:00
Audio thumbnail

जयपुर। राजस्थान मेडिकल काउंसिल (आरएमसी) में फर्जी रजिस्ट्रेशन के बहुचर्चित मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने एक और महत्वपूर्ण गिरफ्तारी की है। एसओजी ने आरएमसी के कर्मचारी फरहान हसन को गिरफ्तार किया है, जो टोंक जिले के मालपुरा का निवासी है। आरोप है कि उसने फर्जी एफएमजी (फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट) प्रमाणपत्रों को सत्यापित बताकर मेडिकल रजिस्ट्रेशन की अनुशंसा की और इसके बदले लाखों रुपये प्राप्त किए।

एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल ने बताया कि विदेश से एमबीबीएस करने वाले अभ्यर्थियों को भारत में चिकित्सकीय अभ्यास के लिए पंजीयन से पहले अनिवार्य एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है। इस परीक्षा का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के बाद ही उन्हें मेडिकल काउंसिल में पंजीयन की अनुमति मिलती है। इसी प्रक्रिया में फर्जीवाड़े की शिकायत मिलने पर 4 फरवरी को एसओजी थाना जयपुर में मामला दर्ज किया गया था, जिसकी जांच जारी है।

जांच में सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों ने एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा पास किए बिना ही फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करवाकर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन प्राप्त कर लिया। इसके बाद वे राजस्थान के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप भी कर रहे थे। एसओजी के अनुसार यह पूरा खेल मेडिकल काउंसिल के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की कथित मिलीभगत से संचालित किया जा रहा था।

जांच के दौरान फरहान हसन की भूमिका सामने आई। वर्ष 2023-24 में वह राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रेशन विभाग में वेरिफाइंग ऑफिसर (कनिष्ठ सहायक) के पद पर कार्यरत था। उसका दायित्व विदेश से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का संबंधित संस्थानों से सत्यापन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करना था। आरोप है कि उसने बिना वास्तविक सत्यापन किए फर्जी एफएमजी प्रमाणपत्रों को सही बताते हुए पंजीयन की अनुशंसा कर दी।

एसओजी के अनुसार फरहान हसन को प्रत्येक फर्जी पंजीयन के बदले 2 से 5 लाख रुपये तक मिलने की जानकारी सामने आई है। वहीं इस पूरे रैकेट का मुख्य आरोपी भंवरराम माली अभ्यर्थियों से फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने और पंजीयन कराने के नाम पर 20 से 30 लाख रुपये तक वसूलता था।

एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि इस मामले में अब तक फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर पंजीयन और इंटर्नशिप प्राप्त करने वाले 18 विदेशी चिकित्सा स्नातक डॉक्टरों, राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश माथुर, मुख्य आरोपी भंवरराम माली तथा एक दलाल को गिरफ्तार किया जा चुका है। फरहान हसन की गिरफ्तारी के बाद मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या और बढ़ गई है।

एसओजी अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अब तक कितने अभ्यर्थियों का पंजीयन कराया गया और इस नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका रही। फरहान हसन से पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ की जा रही है और जांच एजेंसी को इस मामले में और बड़े खुलासों की उम्मीद है।

Previous
Next

Related Posts