



राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व आईएएस अधिकारी एवं तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य जलदाय सचिव सुबोध अग्रवाल के खिलाफ विशेष अदालत में 17,500 पन्नों का आरोप पत्र प्रस्तुत किया है। एसीबी की जांच में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये के टेंडरों में पद के दुरुपयोग, टेंडर पुलिंग और व्यापक वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं।
एसीबी के उप महानिरीक्षक डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरविजन में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने एसीबी मामलों की विशेष अदालत में यह चार्जशीट दाखिल की। अदालत ने मामले को 8 जून के लिए रिपोर्ट श्रेणी में सूचीबद्ध किया है।
फर्जी दस्तावेजों से हासिल किए गए करोड़ों के टेंडर
एसीबी महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया कि जांच में यह सामने आया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लगभग 979.27 करोड़ रुपये के टेंडर प्राप्त किए गए। जांच एजेंसी के अनुसार जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) के कुछ अधिकारियों और निजी ठेकेदारों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की गईं।
जांच में यह भी पाया गया कि 50 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की निविदाओं में नियमों के विपरीत ‘साइट विजिट प्रमाण-पत्र’ को अनिवार्य किया गया था। इससे निविदा प्रक्रिया की गोपनीयता प्रभावित हुई और संभावित बोलीदाताओं की पहचान पहले ही उजागर हो गई।
2024 में दर्ज हुई थी एफआईआर
जल जीवन मिशन घोटाले के संबंध में एसीबी ने वर्ष 2024 में प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच के दौरान सामने आया कि श्रीगणपति ट्यूबवेल और श्रीश्याम ट्यूबवेल नामक फर्मों के संचालकों ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के कथित फर्जी कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र तैयार कराए और पीएचईडी अधिकारियों की मिलीभगत से लगभग 960 करोड़ रुपये के टेंडर हासिल किए।
इस मामले में पहले ही प्रवर्तन निदेशालय ने भी अलग से मामला दर्ज किया था। ईडी की जांच के दौरान तत्कालीन जलदाय मंत्री महेश जोशी सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
महेश जोशी और अन्य के खिलाफ जांच जारी
एसीबी ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकरण में तत्कालीन जलदाय मंत्री महेश जोशी, कारोबारी संजय बड़ाया तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध जांच अभी जारी है। एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इससे पहले एसीबी दिनेश गोयल, कृष्णदीप गुप्ता, शुभांशु दीक्षित, सुशील शर्मा, विशाल सक्सेना, अरुण श्रीवास्तव, डी.के. गौड़, महेंद्र प्रकाश सोनी, मुकेश पाठक और नीरिल कुमार सहित कई आरोपियों के खिलाफ भी आरोप पत्र प्रस्तुत कर चुकी है।
फरार आरोपियों की तलाश जारी
मामले में फरार चल रहे जितेन्द्र शर्मा, मुकेश गोयल और संजीव गुप्ता के खिलाफ स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी किए जा चुके हैं। एसीबी की टीमें इन आरोपियों की तलाश में जुटी हुई हैं।
जल जीवन मिशन से जुड़ा यह मामला राजस्थान के हाल के वर्षों के सबसे चर्चित और बड़े कथित टेंडर घोटालों में गिना जा रहा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले में लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं और जांच आगे भी जारी रहेगी।