



नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने नीट (NEET) पेपर लीक प्रकरण पर बड़ा और स्पष्ट बयान देते हुए इसे पूरे प्रशासनिक एवं परीक्षा प्रबंधन तंत्र की विफलता करार दिया है। बीकानेर दौरे पर पहुंचे मंत्री खर्रा ने कहा कि इस राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण परीक्षा में हुई गड़बड़ी ने लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित किया है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाना चाहिए।
बीकानेर सर्किट हाउस में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों को परीक्षा को निष्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने की जिम्मेदारी दी गई थी, उनमें से कुछ लोगों ने ही व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा कि सिस्टम के भीतर बैठे ऐसे लोगों ने विद्यार्थियों के विश्वास को तोड़ा और मेहनत के दम पर सफलता पाने का सपना देखने वाले लाखों युवाओं के साथ अन्याय किया।
नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि होने के नाते वे इस पूरे घटनाक्रम से प्रभावित विद्यार्थियों की पीड़ा को समझते हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया के दौरान युवाओं को जिस मानसिक तनाव, अनिश्चितता और परेशानी का सामना करना पड़ा, उसके लिए वे व्यक्तिगत रूप से केंद्र और राज्य सरकार की ओर से युवाओं से क्षमा प्रार्थी हैं। उनका यह बयान राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि आमतौर पर ऐसे मामलों में सीधे तौर पर जिम्मेदारी स्वीकार करने वाले बयान कम ही देखने को मिलते हैं।
पत्रकार वार्ता के दौरान नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा से राजस्थान में प्रस्तावित पंचायतीराज और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव कार्यक्रम घोषित करना और चुनाव की तारीख तय करना पूरी तरह से राज्य निर्वाचन आयोग का अधिकार क्षेत्र है। सरकार इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करती।
उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों और पंचायतों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को आरक्षण देने के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की पालना सुनिश्चित की जा रही है। वर्तमान में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग विभिन्न जिलों के आंकड़ों और सामाजिक परिस्थितियों का अध्ययन कर रहा है। आयोग की अंतिम रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होगा।
नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन राज्यमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने अधिकारियों के कार्य व्यवहार और जनसुनवाई से जुड़े मुद्दों पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यदि कोई अधिकारी आमजन की समस्याओं की अनदेखी करता है या जनहित के कार्यों में लापरवाही बरतता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से कहा कि वे तथ्यों सहित शिकायतें उनके सामने रखें ताकि संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया जा सके।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि जनता के कार्यों में अनावश्यक देरी, भ्रष्टाचार या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे मामलों में आवश्यकतानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई और निलंबन जैसे कदम भी उठाए जाएंगे।