Wednesday, 03 June 2026

फर्जी डिग्री प्रकरण के बाद मेवाड़ यूनिवर्सिटी पर बड़ा एक्शन, सभी नए प्रवेशों पर रोक


फर्जी डिग्री प्रकरण के बाद मेवाड़ यूनिवर्सिटी पर बड़ा एक्शन, सभी नए प्रवेशों पर रोक

ख़बर सुनिए:

0:00
0:00
Audio thumbnail

राजस्थान सरकार ने फर्जी डिग्री प्रकरण में सामने आई गंभीर अनियमितताओं के बाद मेवाड़ यूनिवर्सिटी के सभी पाठ्यक्रमों में नए प्रवेशों पर रोक लगा दी है। यह निर्णय उदयपुर संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. मुकेश कुमार शर्मा ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।

सरकारी आदेश के अनुसार, फर्जी डिग्री प्रकरणों की जांच के दौरान विशेष अभियान समूह (एसओजी) द्वारा विश्वविद्यालय से जुड़े कई कार्मिकों और पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित समिति ने विस्तृत जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी, जिसके बाद विश्वविद्यालय में नए प्रवेशों पर रोक लगाने का फैसला लिया गया।

यह मामला तब सामने आया जब राजस्थान लोक सेवा आयोग की प्राध्यापक हिन्दी (स्कूल शिक्षा) प्रतियोगी परीक्षा-2022 में फर्जी डिग्री का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि सांचौर क्षेत्र की कमला कुमारी और चितलवाना क्षेत्र की ब्रह्मा कुमारी ने एमए हिन्दी की कथित फर्जी डिग्रियों के आधार पर पात्रता हासिल करने का प्रयास किया था।

एसओजी की जांच के अनुसार परीक्षा परिणाम घोषित होने तक दोनों अभ्यर्थियों के पास एमए हिन्दी की वैध डिग्री नहीं थी। आरोप है कि उनके भाइयों ने कथित रूप से दो-दो लाख रुपये खर्च कर गंगरार स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी से फर्जी डिग्रियां प्राप्त करवाई थीं। इस मामले का खुलासा आरपीएससी की आंतरिक जांच के दौरान हुआ था।

प्रकरण में एसओजी अजमेर यूनिट ने यूनिवर्सिटी के डिप्टी कंट्रोलर (परीक्षा) सुशील शर्मा और स्टूडेंट सेक्शन ऑफिसर राजेश सिंह राणावत को गिरफ्तार किया था। इसके अतिरिक्त डीन कौशल चंद्रूल, ध्वज कीर्ति शर्मा और वीरेंद्र सिंह पंवार को भी गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि विश्वविद्यालय के नाम पर फर्जी डिग्रियां और अंकतालिकाएं तैयार करने का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था।

मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल वीरेंद्र सिंह को एसओजी ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को खंगाल रही हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि फर्जी डिग्रियों का दायरा कितना व्यापक था।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में उच्च शिक्षा संस्थानों से जुड़े ऐसे मामलों को लेकर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है। ओपीजेएस विश्वविद्यालय में फर्जी डिग्री वितरण और प्रवेश संबंधी अनियमितताओं की पुष्टि के बाद सरकार पहले ही प्रशासक नियुक्त कर नए प्रवेशों पर रोक लगा चुकी है। वहीं जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में भी अपात्र विद्यार्थियों को परीक्षा में बैठाने और प्रमाण पत्र जारी करने का मामला सामने आ चुका है।

सरकार के इस फैसले को उच्च शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब जांच पूरी होने और आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तक मेवाड़ यूनिवर्सिटी में नए प्रवेश नहीं हो सकेंगे।

    Previous
    Next

    Related Posts