



जयपुर। जयपुर के हरमाड़ा क्षेत्र में कृषि विभाग ने नकली उर्वरक बनाने के एक बड़े खेल का खुलासा किया है। रामलियावाला के पास संचालित एक फैक्ट्री में गोबर खाद से जैविक उर्वरक बनाने की आड़ में इंडस्ट्रियल नमक से नकली खाद तैयार की जा रही थी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस नकली उत्पाद को नामी कंपनियों के कट्टों में भरकर ग्रामीण क्षेत्रों में सप्लाई किया जाता था। यदि इस सामग्री का उपयोग खेतों में किया जाता, तो यह उर्वरक के बजाय फसलों को नुकसान पहुंचा सकती थी।
गोपनीय सूचना मिलने के बाद कृषि विभाग की टीम ने शनिवार को फैक्ट्री पर छापा मारा। जांच के दौरान न तो उर्वरक निर्माण का कोई वैध लाइसेंस मिला और न ही गोबर खाद या अन्य जैविक सामग्री, जिससे उर्वरक तैयार किया जाता हो। मौके से करीब 750 कट्टे इंडस्ट्रियल नमक बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार नमक में रंग और अन्य पदार्थ मिलाकर उसे पीसकर नकली उर्वरक का रूप दिया जा रहा था।
कृषि विभाग की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह अवैध फैक्ट्री निखिल शर्मा नामक व्यक्ति द्वारा संचालित की जा रही थी। विभाग को उसके संपर्क नंबर मिल गए हैं और उसकी तलाश की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि निखिल शर्मा की गिरफ्तारी के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि नकली उर्वरक का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसे किन-किन जिलों या क्षेत्रों में सप्लाई किया जा रहा था।
अतिरिक्त निदेशक कृषि विस्तार राकेश अटल को इस संबंध में दो दिन पहले गोपनीय सूचना मिली थी। इसके बाद कृषि अधिकारी उद्यान सांवर मल यादव के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित कर मौके पर भेजी गई। अधिकारियों ने बताया कि जिस परिसर में यह गतिविधि संचालित हो रही थी, वहां किसी प्रकार का बोर्ड या पहचान चिन्ह नहीं लगाया गया था, जिससे बाहरी लोगों को फैक्ट्री की जानकारी न मिल सके।
छापेमारी के दौरान मौके पर दो-तीन मजदूर काम करते मिले। पूछताछ में उन्होंने बताया कि उन्हें कमलेश मीणा नामक व्यक्ति काम पर लेकर आया था। बाद में कमलेश मीणा से संपर्क करने पर उसने स्वयं के जैसलमेर में होने की बात कही और अपने सहयोगी नरेन्द्र मीणा को मौके पर भेजा। नरेन्द्र मीणा ने खुद को मुनीम बताते हुए कहा कि उसे निखिल शर्मा ने काम पर रखा है। जब अधिकारियों ने उससे लाइसेंस और अन्य दस्तावेज मांगे तो वह कोई वैध रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सका।
जांच के दौरान गोदाम में रखे माल से संबंधित एक बिल भी बरामद हुआ। यह बिल 29 मई का बताया गया है, जो कथित तौर पर लखनऊ स्थित एक फर्म द्वारा जारी किया गया था। बिल में सामग्री को गोबर खाद बताया गया था, लेकिन मौके पर ऐसी कोई सामग्री नहीं मिली। इससे पूरे मामले में फर्जी दस्तावेजों और धोखाधड़ी की आशंका भी गहरा गई है।
कृषि विभाग ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नकली उर्वरक किसानों की फसलों और मिट्टी की गुणवत्ता दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना है।