



जयपुर। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सुप्रीमो और सांसद हनुमान बेनीवाल ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ द्वारा कथित रूप से उनके सामाजिक बहिष्कार को लेकर दिए गए बयान की कड़ी आलोचना की है। बेनीवाल ने कहा कि भारत संविधान और कानून से चलने वाला देश है और आज के समय में खाप पंचायतें तक किसी व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार करने जैसे निर्णय नहीं ले सकतीं। ऐसे में किसी राष्ट्रीय दल के प्रदेशाध्यक्ष द्वारा इस प्रकार की टिप्पणी करना लोकतांत्रिक और संवैधानिक मर्यादाओं के विपरीत है।
मीडिया से बातचीत में बेनीवाल ने कहा कि राजस्थान की जनता ने पूर्ववर्ती सरकार के दौरान हुए पेपर लीक, अपराध और कथित माफिया तंत्र से परेशान होकर भाजपा को सत्ता सौंपी थी, लेकिन सरकार बनने के बाद जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप परिणाम दिखाई नहीं दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के वादे किए गए थे, लेकिन अब तक बड़े स्तर पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
बेनीवाल ने राज्य में गौवंश संरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा विपक्ष में रहते हुए गौवंश से जुड़े मामलों पर मुखर रहती थी, लेकिन अब बड़ी घटनाओं पर भी सरकार की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया दिखाई नहीं देती। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी मुद्दों और वास्तविक कार्यों के बीच अंतर स्पष्ट नजर आ रहा है।
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की राजनीतिक स्थिति पर बोलते हुए बेनीवाल ने कहा कि भले ही वर्तमान विधानसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व पहले की तुलना में कम हुआ हो, लेकिन राजस्थान में तीसरे राजनीतिक विकल्प के रूप में आरएलपी अपनी पहचान स्थापित कर चुकी है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी लगातार किसानों, युवाओं, बेरोजगारों और आम जनता के मुद्दों को उठाने का काम कर रही है।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के बयान को लेकर कानूनी कार्रवाई के संकेत देते हुए बेनीवाल ने कहा कि वह इस मामले में उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से परामर्श कर रहे हैं। उनका कहना है कि सामाजिक बहिष्कार जैसी टिप्पणी को हल्के में नहीं लिया जा सकता और संबंधित बयान पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
राज्य सरकार और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर निशाना साधते हुए बेनीवाल ने कहा कि प्रदेश में अपराध, बेरोजगारी, सड़क, पानी और बिजली जैसी समस्याएं गंभीर बनी हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहित के मुद्दों पर अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं दिखा रही है। साथ ही उन्होंने भैराणा धाम आंदोलन के संदर्भ में कहा कि आरएलपी संत समाज और जनहित के मुद्दों पर आगे भी संघर्ष करती रहेगी।