



मऊगंज। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े विवादों और कथित पेपर लीक प्रकरण के बीच मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में छात्रा आकांक्षा चतुर्वेदी की मृत्यु का मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। इसी क्रम में रविवार को एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ मऊगंज पहुंचे और दिवंगत छात्रा के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी।
परिजनों के अनुसार आकांक्षा चतुर्वेदी एक मेधावी छात्रा थीं और डॉक्टर बनने का सपना देख रही थीं। परिवार को उम्मीद थी कि वह नीट परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करेंगी, लेकिन परीक्षा को लेकर उठे विवादों और कथित अनियमितताओं के बीच वह मानसिक रूप से काफी परेशान थीं। परिवार का दावा है कि इसी तनाव ने उन्हें गहरे अवसाद में धकेल दिया।
परिवार ने बताया कि आकांक्षा की पढ़ाई और तैयारी के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से लगभग तीन लाख रुपये का ऋण लिया गया था। आर्थिक रूप से सीमित संसाधनों वाले इस परिवार ने अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किया था।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के निर्देश पर मऊगंज पहुंचे विनोद जाखड़ ने परिवार को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। उन्होंने बताया कि एनएसयूआई की ओर से परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है तथा शेष सहायता राशि भी शीघ्र प्रदान की जाएगी।
मुलाकात के बाद विनोद जाखड़ ने कहा कि यदि देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वास पर प्रश्नचिह्न लगते हैं तो इसका सबसे अधिक असर उन सामान्य और संघर्षशील परिवारों पर पड़ता है, जो अपने बच्चों की शिक्षा के लिए वर्षों तक मेहनत और त्याग करते हैं।
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक छात्रा की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि देश के लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
एनएसयूआई ने आकांक्षा चतुर्वेदी के परिवार के लिए आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी तथा बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किए जाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि ऐसे मामलों में प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत और दीर्घकालिक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
इस घटना के बाद एक बार फिर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बहस तेज हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवाद केवल प्रशासनिक विषय नहीं हैं, बल्कि उनका सीधा संबंध छात्रों के भविष्य, मानसिक स्वास्थ्य और परिवारों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से भी है।
आकांक्षा चतुर्वेदी का मामला अब केवल एक परिवार के दुख तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाली और छात्रों के हितों की रक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।