Saturday, 29 August 2026

सीमावर्ती गांवों के विकास को नई रफ्तार, राजस्थान सरकार ने 184 रणनीतिक गांवों का किया चयन


सीमावर्ती गांवों के विकास को नई रफ्तार, राजस्थान सरकार ने 184 रणनीतिक गांवों का किया चयन

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जयपुर। राजस्थान सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को गति देने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री थार सीमा विकास कार्यक्रम और वाईब्रेंट विलेज प्रोग्राम-द्वितीय के तहत राज्य के पांच सीमावर्ती जिलों के 184 रणनीतिक गांवों का चयन किया है। इन गांवों के समग्र विकास और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रत्येक गांव पर प्रतिवर्ष 3 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना का उद्देश्य सीमा क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें आत्मनिर्भर और मजबूत बनाना है।

चयनित गांवों में सबसे अधिक श्रीगंगानगर जिले के 68 गांव शामिल किए गए हैं। इसके अलावा बीकानेर जिले के 46 गांव, बाड़मेर जिले के 36 गांव, जैसलमेर जिले के 30 गांव तथा फलौदी जिले के 4 गांवों को रणनीतिक गांव के रूप में चुना गया है। सरकार ने सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए व्यापक विकास योजना तैयार की है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा स्वयं इस योजना की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं और अधिकारियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि सीमावर्ती गांवों का विकास केवल सुविधाओं का विस्तार नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय निवासियों के आत्मविश्वास से भी जुड़ा हुआ है।

योजना के तहत चयनित गांवों में सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, बिजली, दूरसंचार और टेलीविजन सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही रोजगार सृजन, पर्यटन विकास, सांस्कृतिक गतिविधियों, युवा सशक्तिकरण, कौशल विकास, वित्तीय समावेशन, स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

सरकार ने वर्तमान में चयनित 184 गांवों में से 123 गांवों में विकास कार्यों की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन गांवों में 232 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 515 विकास कार्य प्रस्तावित किए गए हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से आधारभूत ढांचे को मजबूत करने और ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार लाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा योजना के अंतर्गत सीमा क्षेत्रों के 3,195 गांवों में सड़क, दूरसंचार, टेलीविजन कनेक्टिविटी और विद्युत सुविधाओं को मजबूत करने का कार्य भी किया जाएगा। सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के साथ सामाजिक जुड़ाव और विश्वास बढ़ाने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रशिक्षण शिविर, सामुदायिक बैठकें और जागरूकता अभियान भी आयोजित करेगी।

योजना के प्रभावी संचालन के लिए केंद्र, राज्य और जिला स्तर पर समन्वय तंत्र विकसित किया गया है। ग्राम प्रोफाइल सत्यापन, योजना निर्माण और विकास प्रस्तावों की प्रक्रिया डिजिटल पोर्टल के माध्यम से संचालित की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और कार्यों की गति बढ़ने की उम्मीद है।

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