Wednesday, 03 June 2026

नागौर पोषाहार घोटाला: एसीबी की कार्रवाई, 9 महिला पर्यवेक्षकों सहित 18 आरोपी गिरफ्तार


नागौर पोषाहार घोटाला: एसीबी की कार्रवाई, 9 महिला पर्यवेक्षकों सहित 18 आरोपी गिरफ्तार

राजस्थान के नागौर जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार वितरण में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने कार्रवाई करते हुए 18 अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों में 9 महिला पर्यवेक्षक भी शामिल हैं। एसीबी ने इन सभी को जोधपुर स्थित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मामलों की विशेष अदालत में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने की मांग की, जिसके बाद अदालत ने सभी आरोपियों को जेल भेज दिया। मामले में कुल 21 आरोपी नामजद हैं, जिनमें दो तत्कालीन बाल विकास परियोजना अधिकारी पहले से जमानत पर हैं, जबकि एक निजी व्यक्ति अभी फरार है।

एसीबी जांच में सामने आया कि डेगाना, परबतसर, मकराना और कुचामन सिटी में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार वितरण के नाम पर बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा किया गया। एसीबी के अधिवक्ता प्रवीण वर्मा के अनुसार, मुख्यालय जयपुर को मिली शिकायतों के बाद फोन टैपिंग के जरिए अधिकारियों, लिपिकों और दलालों की बातचीत रिकॉर्ड की गई। जांच में खुलासा हुआ कि विभागीय अधिकारियों ने दलालों और अनाधिकृत ठेकेदारों हरि सिंह चारण, योगेश दायमा और किशोर बैंदा के साथ मिलकर पूरे घोटाले को अंजाम दिया।

जांच में यह भी सामने आया कि इन ठेकेदारों ने 100 से अधिक फर्जी स्वयं सहायता समूह केवल कागजों में तैयार किए और उनके बैंक खाते खुलवाए। नियमों के अनुसार हर गुरुवार को पोषाहार वितरण होना था, लेकिन वास्तविकता में महीने में केवल एक-दो बार ही नाममात्र की आपूर्ति की जाती थी। इसके बावजूद अधिकारियों की मिलीभगत से पूरे महीने के फर्जी बिल पास कर करोड़ों रुपये का भुगतान उठा लिया जाता था।

घोटाले के दौरान रिश्वतखोरी का संगठित तंत्र भी सामने आया है। नागौर उपनिदेशक कार्यालय में तैनात कनिष्ठ सहायक दिलीप कुमार को पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी थी। जांच के अनुसार उसने ठेकेदार हरि सिंह से प्रत्येक परियोजना के लिए 10 हजार रुपये मासिक रिश्वत की मांग रखी थी। वहीं निजी व्यक्ति महेंद्र सिंह ने एसीबी के सामने स्वीकार किया कि वह स्वयं सहायता समूहों के फर्जी रिकॉर्ड तैयार करता था और पदाधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर करता था, जिसकी पुष्टि एफएसएल रिपोर्ट से भी हुई है।

एसीबी के अनुसार, इस घोटाले में 25 प्रतिशत कमीशन का खेल चलता था। फर्जी समूहों के खातों में सरकारी राशि जमा होने के बाद महिला पर्यवेक्षक स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर दबाव डालकर नकद राशि निकलवाती थीं और उसे ठेकेदारों तक पहुंचाया जाता था। इसके बदले अधिकारियों और कर्मचारियों को बिल राशि का 25 प्रतिशत हिस्सा रिश्वत के रूप में मिलता था।

गिरफ्तार आरोपियों में महिला पर्यवेक्षक हेमा अग्रवाल, गीता वर्मा, मनीषा शेखावत, अंजु शर्मा, ज्याना देवी, संतोष देवी, संतोष चौधरी, राजबाला शर्मा और मूली देवी शर्मा शामिल हैं। वहीं आनन्द प्रकाश दायमा, राजेन्द्र त्रिपाठी, खूबचंद, विजेन्द्र सिंह, दिलीप कुमार, कमल किशोर शर्मा, मंजूर अली, राजेन्द्र प्रसाद दायमा और निजी व्यक्ति महेंद्र सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है।

एसीबी की रिमांड अर्जी के अनुसार, कुचामन सिटी के तत्कालीन बाल विकास परियोजना अधिकारी शक्ति सिंह ने 7 करोड़ 33 लाख रुपये से अधिक तथा मकराना की तत्कालीन सीडीपीओ सुधा यादव ने 1 करोड़ 47 लाख रुपये से अधिक का भुगतान फर्जी समूहों को किया था। दोनों अधिकारियों को वर्ष 2019 में ही गिरफ्तार किया जा चुका था और वर्तमान में वे जमानत पर हैं। मामले में आरोपी नरेश दायमा अभी फरार है, जिसकी तलाश जारी है।

एसीबी ने सभी आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने, पद का दुरुपयोग और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं में मामला प्रमाणित माना है।


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