



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारत को बड़ी सांस्कृतिक और तकनीकी उपलब्धि मिली है। इस यात्रा में 11वीं सदी की ऐतिहासिक चोल ताम्र पट्टिकाओं को भारत वापस लाने पर सहमति बनी है। ये लगभग एक हजार वर्ष पुरानी ताम्र पट्टिकाएं चोल साम्राज्य के इतिहास और प्रशासन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी समेटे हुए हैं।
समझौते के तहत 21 बड़ी और 3 छोटी तांबे की पट्टिकाओं का यह संग्रह जल्द भारत लाया जाएगा। इनमें अधिकांश लेख तमिल भाषा में लिखे गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इन ताम्र पट्टिकाओं में राजा राजेंद्र चोल प्रथम और उनके पिता राजा राजराजा चोल प्रथम से जुड़ी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जानकारी दर्ज है।
विशेषज्ञों के अनुसार ताम्र पट्टिकाएं प्राचीन काल में महत्वपूर्ण घोषणाओं, दान, प्रशासनिक निर्णयों और ऐतिहासिक घटनाओं को सुरक्षित रखने के लिए उपयोग में लाई जाती थीं। माना जा रहा है कि 19वीं सदी के दौरान यूरोपीय देशों द्वारा व्यापार और शोध गतिविधियों के समय ये दस्तावेज विदेश पहुंच गए थे।
नीदरलैंड के हेग शहर में प्रधानमंत्री मोदी ने वहां के राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से भी मुलाकात की। यह बैठक शाही महल ‘पैलेस हाउस टेन बॉश’ में आयोजित हुई, जहां दोनों देशों के बीच शिक्षा, तकनीक, सेमीकंडक्टर, डिजिटल तकनीक, जल प्रबंधन और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
यात्रा के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भी बड़ा समझौता हुआ। भारतीय कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिकऔर डच कंपनी एएसएमएल के बीच सेमीकंडक्टर और चिप तकनीक को लेकर सहयोग समझौता किया गया। एएसएमएल दुनिया की प्रमुख चिप मशीन निर्माण कंपनियों में शामिल है, जबकि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तेजी से निवेश बढ़ा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने हेग में आयोजित मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की गोलमेज बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में निवेश और कारोबार के लिए यह सबसे उपयुक्त समय है। उन्होंने बताया कि कर व्यवस्था, श्रम कानूनों और सरकारी प्रक्रियाओं में सुधार के कारण भारत में विनिर्माण गतिविधियां अधिक आसान और किफायती हुई हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जो इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र पहले भारत के लिए बड़ा आयात क्षेत्र था, वह अब तेजी से निर्यात क्षेत्र में बदल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और नीदरलैंड हरित हाइड्रोजन, तकनीक और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने डच कंपनियों से भारत में अधिक निवेश करने की अपील करते हुए कहा कि 300 से अधिक डच कंपनियां पहले से भारत में कार्य कर रही हैं और भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
