Thursday, 14 May 2026

कृषि विज्ञान भर्ती पेपर लीक मामले में पूर्व आरपीएससी अध्यक्ष शिव सिंह राठौड़ से लगातार दूसरे दिन आठ घंटे पूछताछ, आरएएस भर्ती-2018 साक्षात्कार भी जांच के दायरे में


कृषि विज्ञान भर्ती पेपर लीक मामले में पूर्व आरपीएससी अध्यक्ष शिव सिंह राठौड़ से लगातार दूसरे दिन आठ घंटे पूछताछ, आरएएस भर्ती-2018 साक्षात्कार भी जांच के दायरे में

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स्कूल व्याख्याता (कृषि विज्ञान) भर्ती परीक्षा-2022 पेपर लीक मामले की जांच में विशेष अभियान समूह ने कार्रवाई तेज कर दी है। मामले में राजस्थान लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष शिव सिंह राठौड़ से लगातार दूसरे दिन पूछताछ की गई। बुधवार सुबह करीब 10 बजे वे विशेष अभियान समूह मुख्यालय पहुंचे, जहां अधिकारियों ने उनसे लगभग आठ घंटे तक विस्तृत पूछताछ की।

सूत्रों के अनुसार पूछताछ केवल कृषि विज्ञान भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि जांच एजेंसी ने आरएएस भर्ती-2018 और उससे जुड़े साक्षात्कार प्रक्रिया के बारे में भी कई सवाल किए। विशेष रूप से कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के रिश्तेदारों के चयन और उनके साक्षात्कार को लेकर जानकारी मांगी गई। बताया जा रहा है कि उस समय शिव सिंह राठौड़ आरएएस भर्ती-2018 के लिए गठित साक्षात्कार बोर्ड का हिस्सा थे, इसी कारण उनसे चयन प्रक्रिया और मूल्यांकन को लेकर भी सवाल पूछे गए।

जांच एजेंसी ने राजस्थान लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटरा और शिव सिंह राठौड़ को आमने-सामने बैठाकर भी पूछताछ की। इस दौरान विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के प्रश्नपत्र, साक्षात्कार प्रक्रिया और चयन से जुड़े पहलुओं पर सवाल किए गए। सूत्रों का कहना है कि विशेष अभियान समूह को बाबूलाल कटारा से पूछताछ के दौरान कुछ महत्वपूर्ण इनपुट मिले थे, जिनके आधार पर यह कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

हालांकि जांच से जुड़े सूत्र यह भी बता रहे हैं कि आरएएस भर्ती-2018 के साक्षात्कार के समय बाबूलाल कटारा राजस्थान लोक सेवा आयोग का हिस्सा नहीं थे। इसके बावजूद एजेंसी अलग-अलग भर्तियों के बीच संभावित संबंधों और निर्णय प्रक्रिया की जांच कर रही है।

विशेष अभियान समूह अब भर्ती परीक्षाओं से जुड़े दस्तावेज, साक्षात्कार बोर्ड की भूमिका, चयन प्रक्रिया और संभावित प्रभावों की भी गहन जांच कर रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। पेपर लीक और भर्ती अनियमितताओं के मामलों ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों में हलचल बढ़ा दी है।

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