



जयपुर। टीकाराम जूली ने NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने और पेपरलीक मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंपे जाने पर राजस्थान सरकार और जांच एजेंसियों पर सवाल उठाए हैं।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि NEET पेपरलीक की लगातार शिकायतें सामने आने के बावजूद राजस्थान पुलिस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने अब तक स्पष्ट रूप से पेपरलीक का मामला दर्ज क्यों नहीं किया। उन्होंने पूछा कि आखिर इसे शुरू से पेपरलीक क्यों नहीं माना गया।
जूली ने कहा कि अब जबकि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने परीक्षा रद्द कर दी है और केंद्र सरकार ने जांच CBI को सौंप दी है, ऐसे में इस पूरे मामले की जांच अदालत की निगरानी में करवाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की जनता का अब CBI और ED जैसी एजेंसियों पर भरोसा कमजोर हुआ है, इसलिए निष्पक्ष जांच के लिए न्यायिक निगरानी जरूरी है।
उन्होंने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 89 पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं, जो सरकार की परीक्षा प्रणाली की विफलता को दर्शाती हैं। जूली ने आरोप लगाया कि हर बार कार्रवाई और सुधार के बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन वास्तविकता में युवाओं की मेहनत, समय और भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ हो रहा है।
टीकाराम जूली ने राजस्थान सरकार पर मामले को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार ने दो सप्ताह तक सच्चाई को सामने आने से रोकने की कोशिश की और छात्रों के भविष्य को दांव पर लगाए रखा। उन्होंने इसे प्रशासनिक विफलता के साथ-साथ गंभीर गैर-जिम्मेदारी बताया।
उन्होंने कहा कि इससे पहले भी OMR शीट गड़बड़ी जैसे मामलों में सच्चाई दबाने की कोशिश की गई थी, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार की प्राथमिकता पारदर्शिता और न्याय नहीं, बल्कि अपनी छवि बचाना है।
जूली ने मांग की कि पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच हो और परीक्षा प्रक्रिया में शामिल सभी दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में छात्रों के साथ इस प्रकार का अन्याय दोबारा न हो।