



कोटा/जयपुर। कोटा मेडिकल कॉलेज में सीजेरियन डिलीवरी के बाद दो प्रसूताओं की मौत और अन्य महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के मामले में प्रारंभिक जांच में चिकित्सकीय लापरवाही सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा विभाग ने शुक्रवार देर रात बड़ी कार्रवाई करते हुए यूटीबी (अर्जेंट टेंपरेरी बेसिस) पर कार्यरत डॉ. श्रद्धा उपाध्याय को सेवा से हटा दिया, जबकि एक चिकित्सक और दो नर्सिंग कर्मियों को निलंबित कर दिया गया।
जांच के बाद सर्जरी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. नवनीत कुमार, सीनियर नर्सिंग ऑफिसर गुरजीत कौर और निमेश वर्मा को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए निलंबित किया गया है। वहीं वार्ड प्रभारी प्रोफेसर डॉ. बीएल पाटीदार और डॉ. नेहा सिहरा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि पोस्ट गायनिक वार्ड में वरिष्ठ डॉक्टर अनुपस्थित थे और उपचार की जिम्मेदारी रेजिडेंट डॉक्टरों के भरोसे चल रही थी। चिकित्सा आयुक्त बीएल गोयल ने संभागीय आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल और मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. निलेश जैन के साथ करीब तीन घंटे तक अस्पताल में जांच की। इस दौरान प्रसूताओं को दी गई दवाओं, ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और ऑपरेशन करने वाले चिकित्सकों से जुड़ी जानकारी जुटाई गई। अधिकारियों ने भर्ती महिलाओं और उनके परिजनों से भी बातचीत की।
सूत्रों के अनुसार प्रसूताओं के इलाज के दौरान एक वरिष्ठ चिकित्सक के अनुपस्थित रहने के कारण ऑपरेशन की जिम्मेदारी सीनियर रेजिडेंट को सौंप दी गई थी। मामले ने तब गंभीर रूप लिया जब 4 मई को विज्ञान नगर निवासी सपना की सीजेरियन डिलीवरी के बाद नवजात बच्ची की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि बच्ची जन्म के बाद पूरी तरह स्वस्थ थी, लेकिन एनआईसीयू में टीका लगाए जाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। इस पूरे मामले को लेकर राजस्थान कांग्रेस ने भी चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि समिति तीन दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
वहीं चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर मरीजों को एयरलिफ्ट कर जयपुर लाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन परिजन इसके लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने कहा कि जयपुर से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भेजी गई है और सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।