



नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के निजी स्टाफ में बड़े स्तर पर फेरबदल के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 3 जुलाई को जारी आदेशों के तहत मंत्री के निजी स्टाफ से जुड़े चार अधिकारियों को हटाया गया या उनके मूल विभाग में वापस भेजा गया है। इस कदम को सामान्य प्रशासनिक फेरबदल से अलग और अहम माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, भूपेंद्र यादव के मुख्य निजी सचिव अमर सिंह को उनके मूल कैडर में वापस भेज दिया गया है। अमर सिंह 2010 बैच के आईआरएस-आईटी अधिकारी हैं। वे लंबे समय से भूपेंद्र यादव के साथ कार्यरत थे। जब भूपेंद्र यादव वर्ष 2021 से 2024 तक श्रम मंत्री रहे, तब भी अमर सिंह उनके निजी सचिव थे। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद यादव के पर्यावरण मंत्री बनने पर उन्हें फिर निजी सचिव नियुक्त किया गया था।
इसके अलावा अतिरिक्त निजी सचिव शैलेश कुमार सिंह को समय से पहले उनके मूल विभाग में वापस भेजा गया है। वहीं अतिरिक्त निजी सचिव आयुष सारण और सहायक निजी सचिव सिद्धार्थ यादव की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि इन अधिकारियों को हटाने के पीछे की वजह को लेकर सरकार या विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।
एक साथ निजी स्टाफ के कई अधिकारियों को हटाए जाने के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं होने के कारण इस मामले में अभी तक केवल प्रशासनिक आदेशों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के आधार पर ही चर्चा हो रही है।
कांग्रेस नेता और राज्यसभा सदस्य जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री के स्टाफ से जुड़े अधिकारियों को हटाए जाने को चौंकाने वाला बताया और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी इस मामले को लेकर X पर पोस्ट किया और कहा कि केंद्रीय मंत्री के स्टाफ में कौन रहेगा और किसे हटाया जाएगा, यह केंद्र सरकार का विशेषाधिकार है, लेकिन इस तरह की कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है।
भूपेंद्र यादव राजस्थान के अलवर से सांसद हैं और केंद्र सरकार में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री हैं। इससे पहले वे श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का दायित्व भी संभाल चुके हैं। भाजपा संगठन में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में उनके निजी स्टाफ में अचानक हुए इस बदलाव को लेकर राजनीतिक हलकों में अधिक चर्चा हो रही है।
फिलहाल इस मामले में केंद्र सरकार, मंत्रालय या स्वयं भूपेंद्र यादव की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जब तक कारणों को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं आती, तब तक यह मामला प्रशासनिक फेरबदल और राजनीतिक सवालों के बीच चर्चा में बना रहेगा।


