Wednesday, 06 May 2026

करतारपुरा नाले के पुनर्विकास पर हाईकोर्ट में जयपुर विकास प्राधिकरण का आश्वासन, 150 करोड़ की योजना से होगा कायाकल्प


करतारपुरा नाले के पुनर्विकास पर हाईकोर्ट में जयपुर विकास प्राधिकरण का आश्वासन, 150 करोड़ की योजना से होगा कायाकल्प

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जयपुर। शहर के करतारपुरा नाले में अतिक्रमण और अव्यवस्था से जुड़े मामले में जयपुर विकास प्राधिकरण ने मंगलवार को राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष विस्तृत योजना प्रस्तुत करते हुए नाले के पुनर्विकास का आश्वासन दिया। जेडीए ने शपथ पत्र में बताया कि लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से नाले को विकसित किया जाएगा, जिसमें इसकी चौड़ाई 32.60 मीटर निर्धारित कर आरसीसी से पक्का किया जाएगा। साथ ही जल प्रवाह के दोनों ओर पांच-पांच मीटर का कॉरिडोर विकसित किया जाएगा।

जेडीए के अधिवक्ता अमित कुड़ी ने कोर्ट को बताया कि इस परियोजना का डिजाइन एमएनआईटी के विशेषज्ञों की सलाह से तैयार किया गया है, जिसमें अगले 100 वर्षों की जल निकासी क्षमता को ध्यान में रखा गया है। योजना के तहत नाले की गाद हटाकर उसे पक्का किया जाएगा और वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली के माध्यम से जल संरक्षण की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा नाले के पानी को फिल्टर कर 25 कुओं के जरिए भूजल पुनर्भरण की दिशा में कार्य किया जाएगा और सीवरेज को द्रव्यवती नदी के एसटीपी प्लांट से जोड़ा जाएगा।

जेडीए ने स्पष्ट किया कि भविष्य में करतारपुरा नाले में किसी भी नई सीवरेज लाइन को जोड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी और मौजूदा सीवरेज लाइनों को भी अन्यत्र स्थानांतरित किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य नाले को सुव्यवस्थित करना, जलभराव की समस्या को खत्म करना और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना है।

इस मामले में दायर जनहित याचिका में अधिवक्ताओं विमल चौधरी और योगेश ने नाले में अतिक्रमण, गंदगी और संकुचित चौड़ाई के कारण हो रही दुर्घटनाओं का मुद्दा उठाया था। याचिका में बताया गया कि मानसून के दौरान नाले में कई हादसे हो चुके हैं, जिनमें एक युवक की कार सहित बहने से मौत भी हो चुकी है।

जेडीए की ओर से नाले की चौड़ाई 32.60 मीटर रखने और पुनर्विकास योजना का आश्वासन मिलने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ—जस्टिस डॉ. पी.एस. भाटी और जस्टिस विनीत कुमार माथुर—ने इस जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया। अदालत ने पहले जेडीए को नई योजना के साथ शपथ पत्र पेश करने के निर्देश दिए थे, जिसके अनुपालन में यह योजना प्रस्तुत की गई।

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