



नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने देश में ऋण वसूली तंत्र को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने के उद्देश्य से आज विज्ञान भवन, नई दिल्ली में ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरणों (डीआरएटी) के अध्यक्षों एवं डेब्ट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) के पीठासीन अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया। इस अवसर पर डीएफएस के सचिव ने वरिष्ठ अधिकारियों, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बैंकों के प्रतिनिधियों तथा भारतीय बैंक संघ के सदस्यों को संबोधित करते हुए लंबित मामलों में कमी लाने और उनके शीघ्र निस्तारण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
संगोष्ठी में न्यायाधिकरणों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए ठोस कदमों पर विचार-विमर्श किया गया। बताया गया कि लक्षित प्रशिक्षण कार्यक्रमों, क्षमता निर्माण और बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण के कारण हाल के समय में डीआरटी की मासिक निस्तारण दरों में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले न्यायाधिकरणों द्वारा अपनाई गई सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को अन्य न्यायाधिकरणों द्वारा भी अपनाने पर जोर दिया गया, ताकि पूरे देश में एक समान दक्षता सुनिश्चित की जा सके।
वित्तीय सेवा विभाग द्वारा आयोजित इस प्रकार की संगोष्ठियां नीतिगत संवाद और सुधारों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य कर रही हैं। इन बैठकों के माध्यम से न्यायाधिकरणों के बीच अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान होता है, जिससे उनके कार्यप्रणाली में ठोस सुधार देखने को मिलते हैं। इस दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि बैंकों के भीतर निगरानी एवं पर्यवेक्षण तंत्र को और मजबूत किया जाए, ताकि डीआरटी के माध्यम से वसूली की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। उच्च मूल्य वाले मामलों को प्राथमिकता देने, प्रक्रियात्मक सुधारों को गति देने तथा लोक अदालतों को वैकल्पिक विवाद समाधान के प्रभावी माध्यम के रूप में उपयोग करने पर भी बल दिया गया।
तकनीकी दृष्टि से, संगोष्ठी में अनिवार्य ई-फाइलिंग, हाइब्रिड सुनवाई व्यवस्था और ई-डीआरटी 2.0 प्लेटफॉर्म के व्यापक उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। इन उपायों से न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने के साथ-साथ मामलों के निस्तारण में तेजी आने की संभावना है। साथ ही, नए बांकनेट ई-नीलामी प्लेटफॉर्म के माध्यम से परिसंपत्तियों की बेहतर दृश्यता और उचित मूल्य प्राप्ति को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।
डीएफएस ने स्पष्ट किया कि वह एक मजबूत, पारदर्शी और कुशल ऋण वसूली तंत्र विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे न केवल बैंकों की वसूली प्रक्रिया में सुधार होगा, बल्कि संपूर्ण वित्तीय प्रणाली में अनुशासन और विश्वास भी सुदृढ़ होगा।