



राजस्थान हाईकोर्ट ने पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों को अयोग्य ठहराने के नोटिसों से जुड़े मामले में दायर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस शुभा मेहता की खंडपीठ ने मोहनलाल नामा की रिव्यू पिटीशन को निरस्त करते हुए 19 दिसंबर 2023 के आदेश को यथावत रखा।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि पूर्व निर्णय में यह साफ हो चुका है कि मामला अब सारहीन हो गया है, इसलिए इसे आगे चलाने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पुनर्विचार याचिका का दायरा सीमित होता है और इसके माध्यम से मामले की दोबारा विस्तृत सुनवाई नहीं की जा सकती।
यह मामला जुलाई 2020 की राजनीतिक घटनाओं से जुड़ा है, जब सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायक मानेसर चले गए थे। उस दौरान तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने पार्टी व्हिप के उल्लंघन के आरोप में उन्हें अयोग्य ठहराने के नोटिस जारी किए थे। इन नोटिसों को पायलट गुट ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जहां हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे।
बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जो अभी भी लंबित है। वहीं 19 दिसंबर 2023 को सुनवाई के दौरान यह दलील दी गई थी कि 16वीं विधानसभा के गठन के बाद याचिका का कोई औचित्य नहीं रह गया है, जिस पर अदालत ने इसे सारहीन मानते हुए खारिज कर दिया था।
इसके बाद मोहनलाल नामा ने इस आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसमें सुनवाई का अवसर नहीं मिलने और कानूनी बिंदुओं पर विचार न किए जाने की बात कही गई थी। याचिका में संविधान के दसवें अनुसूची (दल-बदल कानून) से जुड़े मुद्दों का भी हवाला दिया गया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और पुनर्विचार की मांग को खारिज कर दिया।