Friday, 01 May 2026

ऋण वसूली अधिकरण, जयपुर का आदेश, M/s Power Corporation की सिक्योरिटाइजेशन एप्लीकेशन खारिज, पंजाब एंड सिंध बैंक की ₹ 2.76 करोड़ नीलामी को ठहराया वैध


ऋण वसूली अधिकरण, जयपुर का आदेश, M/s Power Corporation की सिक्योरिटाइजेशन एप्लीकेशन खारिज, पंजाब एंड सिंध बैंक की ₹ 2.76 करोड़   नीलामी को ठहराया वैध

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जयपुर। ऋण वसूली अधिकरण, जयपुर ने M/s Power Corporation व अन्य बनाम पंजाब सिंध बैंक मामले में बैंक के पक्ष में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। प्रकरण SA No. 63/2025 में प्रीसाइडिंग ऑफिसर विमल गुप्ता ने 27 अप्रैल 2026 को आदेश देते हुए आवेदकों की सिक्योरिटाइजेशन एप्लीकेशन खारिज कर दी। मामले में आवेदकों की ओर से राम नरेश विजय, बैंक की ओर से अधिवक्ता तपिश सारस्वत उपस्थित रहे।

आवेदकों ने बैंक की 13 दिसंबर 2024 की नीलामी सूचना को चुनौती देते हुए आरोप लगाया था कि बैंक ने संपत्ति की स्थिति, मूल्यांकन, नोटिस सेवा और नीलामी प्रक्रिया में अनियमितता बरती। आवेदकों का कहना था कि संपत्ति का बाजार मूल्य अधिक था, जबकि बैंक ने कम रिजर्व प्राइस तय कर नीलामी की।

बैंक ने इन आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि यह संपत्ति की 9 वीं नीलामी थी। इससे पहले 8 नीलामियां अधिक रिजर्व प्राइस पर विफल हो चुकी थीं, क्योंकि कोई बोलीदाता सामने नहीं आया। बैंक के अनुसार 30 दिसंबर 2024 की नीलामी में दो बोलीदाता शामिल हुए और अंतिम बोली ₹ 2,76,30,000 पर पुष्टि हुई, जो रिजर्व प्राइस से करीब ₹ 78.6 लाख अधिक थी।

अधिकरण ने रिकॉर्ड देखने के बाद पाया कि आवेदकों ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों को सही रूप में प्रस्तुत नहीं किया। आदेश में उल्लेख किया गया कि याचिका पहले बिना विधिवत अटेस्टेशन के दाखिल की गई और बाद में वही याचिका अटेस्टेड रूप में पेश की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि हस्ताक्षर नोटरी पब्लिक के समक्ष नहीं किए गए थे।

DRT ने यह भी कहा कि आवेदकों ने मांग नोटिस, कब्जा नोटिस और आगे की कार्यवाही को अवैध बताने का प्रयास किया, लेकिन यह छिपाया कि संपत्ति पहले ही कई बार नीलामी में रखी जा चुकी थी और वर्तमान नीलामी 9वीं नीलामी थी। अधिकरण ने यह भी नोट किया कि व्हाट्सएप मैसेज और ईमेल को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के कानून के अनुसार प्रमाणित नहीं किया गया था।

अधिकरण ने विशेष रूप से नोट किया कि 30 दिसंबर2024 को हुई नीलामी में कुल 603 बोलियां प्राप्त हुईं, जहां संपत्ति का रिजर्व मूल्य ₹ 1.92 करोड़ था, जबकि अंतिम बिक्री ₹2.76 करोड़ में हुई — जो स्पष्ट रूप से प्रतिस्पर्धात्मक और पारदर्शी नीलामी को दर्शाता है। अधिकरण ने कहा कि आवेदक महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने और गलत तथ्य प्रस्तुत करने के दोषी हैं। DRT ने सिक्योरिटाइजेशन एप्लीकेशन को खारिज करते हुए बैंक को निर्देश दिया कि वह नीलामी प्रक्रिया आगे बढ़ाए, नीलामी क्रेता से शेष भुगतान स्वीकार करे, सेल सर्टिफिकेट जारी करे, उसका पंजीकरण कराए और कब्जा सौंपे।

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