Saturday, 25 April 2026

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बोले- डेयरी विकास बनेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार, सरस उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग पर जोर


मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बोले- डेयरी विकास बनेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार, सरस उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग पर जोर

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जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि डेयरी विकास राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन रहा है और इससे अधिकाधिक पशुपालकों को जोड़कर उनकी आय बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डेयरी क्षेत्र में नवाचार, गुणवत्ता और प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए इसे और सशक्त बनाया जाए।

मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन की प्रगति, विस्तार और विभिन्न योजनाओं की अनुपालना को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में मुख्यमंत्री ने सरस उत्पादों की उच्च गुणवत्ता बनाए रखते हुए उनकी बेहतर मार्केटिंग और विपणन के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दुग्ध उत्पादकों और उपभोक्ताओं के हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना जैसी योजनाएं पशुपालकों के लिए आर्थिक संबल बन रही हैं, जबकि सरस के शुद्ध और सुलभ उत्पाद आमजन के लिए गुणवत्ता का पर्याय बन चुके हैं।

बैठक में ‘सरस’ ब्रांड के विस्तार को लेकर सरस स्मार्ट, सरस कैफे और सरस सिग्नेचर प्लाजा जैसे आधुनिक आउटलेट्स स्थापित करने की योजना पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि खाटू श्यामजी, सालासर, नाथद्वारा, पुष्कर और अजमेर जैसे धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर इन आउटलेट्स के जरिए ब्रांडिंग को बढ़ावा दिया जाए। साथ ही उपभोक्ताओं के लिए आवश्यक सुविधाएं भी विकसित की जाएं।

मुख्यमंत्री ने विकसित ग्राम एवं विकसित वार्ड अभियान के तहत प्राप्त जानकारी के आधार पर नए डेयरी बूथ स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कलेक्ट्रेट सहित सरकारी कार्यालयों की कैंटीनों में राजीविका के माध्यम से सरस स्मार्ट पार्लर संचालित किए जाएं। इसके साथ ही सरकारी अस्पतालों, रोडवेज बस स्टैंडों और राजस्थान पर्यटन विकास निगम के होटलों में भी सरस स्मार्ट प्लाजा एवं पार्लर शुरू करने की दिशा में कार्य किया जाए।

बैठक में यह भी बताया गया कि वर्तमान में राज्य में प्रतिदिन लगभग 45 लाख लीटर दूध संकलन हो रहा है। इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर पहले चरण में 65 लाख लीटर और दूसरे चरण में 85 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए नए क्षेत्रों में दुग्ध सहकारी समितियों की स्थापना की जा रही है। पशुपालकों को बेहतर मूल्य दिलाने के लिए दूध खरीद दर को 50 रुपए से बढ़ाकर 52 रुपए प्रति किलोग्राम फैट किया गया है। इससे पशुपालकों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दूध संकलन से लेकर बिक्री तक गुणवत्ता नियंत्रण का मजबूत निगरानी तंत्र विकसित करने और मिलावट पर सख्त रोक लगाने के निर्देश दिए। बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने के लिए लगभग 530 करोड़ रुपए की लागत से विभिन्न जिलों में नए प्लांट लगाए जा रहे हैं तथा मौजूदा इकाइयों का विस्तार किया जा रहा है।

बैठक में पशुपालन एवं डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) अखिल अरोड़ा, प्रमुख शासन सचिव पशुपालन विकास सीताराम भाले, शासन सचिव सहकारिता डॉ. समित शर्मा, RCDF की प्रबंध निदेशक श्रुति भारद्वाज और सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।




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