Wednesday, 22 April 2026

विधायक पुत्री के कथित फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र मामले में SOG की एंट्री, ब्यावर अस्पताल में रिकॉर्ड खंगाले


विधायक पुत्री के कथित फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र मामले में SOG की एंट्री, ब्यावर अस्पताल में रिकॉर्ड खंगाले

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ब्यावर। राजस्थान में कथित फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र प्रकरण ने अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक रूप ले लिया है। ब्यावर विधानसभा क्षेत्र से विधायक शंकरसिंह रावत की पुत्री और तहसीलदार कंचन से जुड़े चर्चित मामले की जांच अब ब्यावर तक पहुंच गई है। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की टीम ने ब्यावर पहुंचकर राजकीय अमृत कौर चिकित्सालय में दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। टीम ने अस्पताल में दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले और संबंधित चिकित्सा बोर्ड की प्रक्रिया की जानकारी जुटाई।

सूत्रों के अनुसार, एसओजी की टीम ने अस्पताल पहुंचते ही सीधे पीएमओ कार्यालय में दस्तक दी। यहां टीम ने दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने से संबंधित दस्तावेजों, पत्रावलियों और मेडिकल रिकॉर्ड की गहन जांच की। कई अहम दस्तावेज मांगे गए हैं, जिनकी बारीकी से पड़ताल की जाएगी। प्रारंभिक स्तर पर प्रमाण पत्र जारी करने में अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद एसओजी ने मामले को अपने हाथ में लिया है।

जांच के दौरान प्रमाण पत्र जारी करने वाले चिकित्सकों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी गहन पड़ताल की जा रही है। टीम यह जानने में जुटी है कि मेडिकल बोर्ड का गठन किस प्रकार हुआ, प्रमाण पत्र किन परिस्थितियों में जारी किया गया और क्या सभी नियमानुसार जांच प्रक्रिया पूरी की गई थी या नहीं। सूत्रों के मुताबिक टीम की कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा गया है और जांच के दौरान अस्पताल परिसर में आवाजाही भी सीमित रही।

यह जांच केवल ब्यावर तक सीमित नहीं है। प्रदेशभर में दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर विभिन्न सरकारी पदों पर नियुक्त कर्मचारियों की जांच की जा रही है। इसी क्रम में ब्यावर के अमृत कौर चिकित्सालय में भी रिकॉर्ड खंगाले गए। टीम ने यह भी जानकारी जुटाई कि दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने से पहले कौन-कौन सी मेडिकल जांच की गई, जांच किस लैब में हुई और मेडिकल बोर्ड में कौन-कौन चिकित्सक शामिल थे।

मामले में विधायक शंकरसिंह रावत की पुत्री तहसीलदार कंचन से जुड़े दिव्यांगता प्रमाण पत्र को लेकर भी शिकायतें सामने आई थीं। हालांकि जांच एजेंसी ने आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं किया है कि किन-किन मामलों की फाइलें जांच के दायरे में हैं। लेकिन कंचन के प्रमाण पत्र का मामला प्रदेशभर में पहले से ही चर्चा का विषय बना हुआ है, जिससे इस जांच को राजनीतिक रूप से भी बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।

एसओजी की जांच फिलहाल कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर केंद्रित है। इनमें यह शामिल है कि दिव्यांग प्रमाण पत्र कहां से जारी हुआ, कब जारी हुआ, जारी करने वाले डॉक्टर कौन थे, मेडिकल जांच किस आधार पर हुई और प्रमाण पत्र के आधार पर किन-किन लोगों ने सरकारी नौकरी हासिल की। आने वाले दिनों में जांच में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो सकती है।

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