



जयपुर। राजस्थान में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) के कांट्रैक्टर्स द्वारा पिछले 10 दिनों से जारी हड़ताल को राज्य सरकार के साथ हुई सकारात्मक, रचनात्मक और परिणामदायी वार्ता के बाद स्थगित कर दिया गया है। इस फैसले के बाद प्रदेशभर में पेयजल आपूर्ति बाधित होने की आशंका फिलहाल टल गई है और जलापूर्ति व्यवस्था के सुचारु संचालन का रास्ता साफ हो गया है। हड़ताल स्थगित होने से आमजन ने राहत की सांस ली है।
यह महत्वपूर्ण निर्णय जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री कन्हैयालाल चौधरी के साथ हुई विस्तृत चर्चा और सकारात्मक संवाद के बाद लिया गया। कांट्रैक्टर्स प्रतिनिधियों और सरकार के बीच कई दौर की बातचीत के बाद आपसी सहमति बनी, जिसके तहत आंदोलन को 5 मई 2026 तक स्थगित रखने का फैसला किया गया है। माना जा रहा है कि इस अवधि में सरकार लंबित मांगों पर ठोस कार्रवाई करेगी।
वार्ता के दौरान राज्य सरकार ने कांट्रैक्टर्स की प्रमुख मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए बड़े भुगतान का आश्वासन दिया। सरकार की ओर से बताया गया कि मई 2026 तक 2500 करोड़ रुपये का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा, जबकि जून 2026 के अंत तक अतिरिक्त 2500 करोड़ रुपये जारी किए जाएंगे। यानी कुल 5000 करोड़ रुपये के भुगतान का भरोसा देकर सरकार ने कांट्रैक्टर्स को मनाने में बड़ी सफलता हासिल की है।
बैठक में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी। मई 2024 तक पूर्ण किए गए कार्यों पर नियमानुसार एलडी (लिक्विडेटेड डैमेज) में राहत देने का आश्वासन दिया गया। जिन टेंडर्स में प्राइस वेरिएशन क्लॉज लागू है, उनमें नियमानुसार लाभ देने पर सहमति बनी। वहीं, 90 प्रतिशत तक पूर्ण हो चुके कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर फाइनल कर शीघ्र हैंडओवर सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया, ताकि विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके।
इसके अलावा जीएसटी अंतर राशि के भुगतान के मुद्दे पर भी सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया है। इस संबंध में 10 दिनों के भीतर वित्त विभाग को प्रस्ताव भेजने की बात कही गई है, जिससे कांट्रैक्टर्स को आर्थिक राहत मिल सके। यह फैसला लंबे समय से लंबित भुगतान को लेकर नाराज ठेकेदारों के लिए राहत भरा माना जा रहा है।
सरकार और कांट्रैक्टर्स के बीच बनी इस सहमति से प्रदेश में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था सुचारु बनी रहेगी और जल संकट की संभावनाएं कम होंगी। साथ ही, रुके हुए विकास कार्यों को भी गति मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता न केवल कांट्रैक्टर्स बल्कि आमजन के हित में भी एक बड़ा कदम है, जिससे राजस्थान में आधारभूत सुविधाओं और विकास परियोजनाओं को मजबूती मिलेगी।