



जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने अजमेर डेयरी (जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ) के मामले में महत्वपूर्ण अंतरिम राहत देते हुए निर्वाचित अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी के पक्ष में आदेश पारित किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा संचालक मंडल को भंग करने की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए 15 मई तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि इस अवधि में न तो संचालक मंडल भंग किया जाएगा और न ही प्रशासक नियुक्त किया जाएगा।
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि निर्वाचित बोर्ड को हटाने की प्रक्रिया लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विपरीत है और बिना उचित कारण तथा प्रक्रिया का पालन किए सरकार हस्तक्षेप कर रही है। राज्य सरकार की ओर से तर्क रखा गया कि सहकारी संस्थाओं के संचालन में अनियमितताओं की शिकायतें हैं, जिनके मद्देनज़र प्रशासनिक कदम उठाए गए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बादराजस्थान हाई कोर्टने अंतरिम राहत देते हुए फिलहाल किसी भी कठोर कार्रवाई पर रोक लगा दी।
सूत्रों के अनुसार राज्य स्तर पर बोर्ड भंग कर प्रशासक नियुक्त करने की तैयारी चल रही थी। यदि यह कदम लागू होता, तो डेयरी के संचालन और आगामी चुनावी प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ता। कोर्ट के आदेश के बाद अब स्थिति पूर्ववत रहेगी और बोर्ड अपने कार्य करता रहेगा। मामले की अगली सुनवाई तक सरकार को स्थिति में कोई बदलाव नहीं करने का निर्देश दिया गया है। यह आदेश सहकारी संस्थाओं में निर्वाचित निकायों की स्वायत्तता और प्रशासनिक हस्तक्षेप की सीमा को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी पक्षों की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस विवाद के दीर्घकालिक समाधान की दिशा तय होगी।