



संसद के विशेष सत्र का तीसरा दिन राजनीतिक गतिरोध के साथ समाप्त हुआ। केंद्र सरकार द्वारा महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक पर चर्चा के लिए बुलाए गए इस तीन दिवसीय विशेष सत्र के अंतिम दिन दोनों सदनों की कार्यवाही महज 10 मिनट चली और इसके बाद लोकसभा व राज्यसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
विशेष सत्र के दौरान शुक्रवार को महिला आरक्षण बिल पर वोटिंग कराई गई, लेकिन सरकार इसके समर्थन में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सकी। इस कारण विधेयक पारित नहीं हो पाया और सत्र का समापन बिना किसी ठोस परिणाम के हो गया।
इस बीच कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार महिलाओं के हित में गंभीर है, तो उसे पहले से तैयार और सभी दलों की सहमति वाले पुराने विधेयक को तुरंत संसद में पेश करना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सोमवार को पुनः सत्र बुलाकर उस विधेयक पर मतदान कराया जाए, जिससे स्पष्ट हो सके कि महिलाओं के अधिकारों के पक्ष में कौन है।
संसद की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे शुरू हुई थी, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष ने बजट सत्र के दौरान हुए कामकाज की जानकारी दी। हालांकि, राजनीतिक सहमति के अभाव और बहुमत नहीं जुटा पाने के कारण कार्यवाही जल्द ही समाप्त कर दी गई।
इस घटनाक्रम ने महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर राजनीतिक मतभेदों को उजागर कर दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मुद्दे पर आगे क्या रणनीति अपनाती है और क्या भविष्य में इस विधेयक को फिर से संसद में लाया जाएगा।