Saturday, 18 April 2026

राजस्थान में अफसरों के लिए नया दौरा आदेश विवादों में: हर माह 4 जिलों का दौरा और नाइट हॉल्ट अनिवार्य


राजस्थान में अफसरों के लिए नया दौरा आदेश विवादों में: हर माह 4 जिलों का दौरा और नाइट हॉल्ट अनिवार्य

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जयपुर । वी. श्रीनिवास द्वारा जारी नए प्रशासनिक आदेश ने राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में हलचल मचा दी है। प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग के इस आदेश के तहत मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS), प्रमुख सचिव, सचिव और जिला प्रभारी सचिवों को हर महीने कम से कम चार जिलों का दौरा करना और चार रात्रि विश्राम (नाइट हॉल्ट) करना अनिवार्य कर दिया गया है।

सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य प्रशासनिक निगरानी को मजबूत करना और योजनाओं के क्रियान्वयन को जमीनी स्तर पर तेज करना है। नए निर्देशों के अनुसार, प्रशासनिक सचिवों को हर महीने चार अलग-अलग जिलों का दौरा कर वहां रात्रि विश्राम करना होगा। इसके अलावा उन्हें हर माह एक संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक भी आयोजित करनी होगी।

वहीं, जिला प्रभारी सचिवों के लिए भी अपने-अपने जिलों में कम से कम एक दिन का दौरा और एक रात्रि विश्राम अनिवार्य किया गया है, ताकि वे योजनाओं और परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर सकें।

हालांकि, इस आदेश को लेकर अधिकारियों में असंतोष देखा जा रहा है। उनका कहना है कि महीने में पहले से ही 8 से 10 छुट्टियां (शनिवार, रविवार और त्योहार) होती हैं। ऐसे में चार दिन का दौरा और रात्रि विश्राम मिलाकर उन्हें कम से कम 8 दिन जयपुर से बाहर रहना पड़ेगा। प्रभारी सचिवों के लिए यह अवधि 10 दिन तक पहुंच सकती है, जिससे नियमित प्रशासनिक कार्य और बैठकों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

अधिकारियों ने यह भी चिंता जताई है कि प्रदेश में आईएएस अधिकारियों की सीमित संख्या के कारण इस आदेश का पालन व्यावहारिक रूप से कठिन हो सकता है। राज्य में कुल 332 आईएएस पद स्वीकृत हैं, जिनमें से करीब 246 अधिकारी ही राज्य सरकार के पास उपलब्ध हैं। इनमें भी कई अधिकारी प्रशिक्षण या प्रतिनियुक्ति पर हैं, जिससे वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों की संख्या और कम हो जाती है।

दूसरी ओर, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने स्पष्ट किया है कि आदेश में 10 दिन बाहर रहने जैसी कोई बाध्यता नहीं है। उन्होंने कहा कि केवल यह निर्देश है कि जो अधिकारी दौरे पर जाएंगे, वे उसी दिन संबंधित जिले में रात्रि विश्राम करें। उनका मानना है कि अधिकारियों को जमीनी स्तर पर जाकर योजनाओं की स्थिति देखनी चाहिए, जिससे बेहतर निगरानी और समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।

यह आदेश अब प्रशासनिक हलकों में बहस का विषय बन गया है, जहां एक ओर सरकार इसे सुधारात्मक कदम बता रही है, वहीं अधिकारी इसे व्यावहारिक चुनौतियों से जुड़ा निर्णय मान रहे हैं।

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