



जयपुर में बीटू बाइपास से द्रव्यवती नदी तक फैली करीब 42 बीघा सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने पहुंची हाउसिंग बोर्ड की टीम को विरोध और पथराव का सामना करना पड़ा। इस जमीन की अनुमानित कीमत 2200 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद हाउसिंग बोर्ड प्रशासन को इस अवाप्तशुदा भूमि का कब्जा लेना था। इसी के तहत उप-आवासन आयुक्त संजय शर्मा के नेतृत्व में टीम गुरुवार को जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंची। कार्रवाई के दौरान बाउंड्री वॉल, कोठरियों और अन्य अवैध निर्माणों को तोड़ना शुरू किया गया। इस दौरान वहां रहने वाले लोगों ने विरोध जताया और हंगामा कर दिया। स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब कुछ महिलाओं ने जेसीबी मशीन पर पत्थर फेंक दिए। हालात को देखते हुए अधिकारियों ने कुछ समय के लिए कार्रवाई रोक दी।
जानकारी के अनुसार, यह जमीन हाउसिंग बोर्ड द्वारा वर्ष 1989 में अवाप्त की गई थी और 1991 में प्रक्रिया पूरी हो गई थी, लेकिन उस समय कब्जा नहीं लिया जा सका। बाद में कुछ भूमाफियाओं ने कथित रूप से जवाहरपुरी भवन निर्माण सहकारी समिति के पट्टों के आधार पर यहां कॉलोनी बसा दी और भूखंडों का बेचान कर दिया।
बताया जा रहा है कि इस जमीन का सौदा वर्ष 1981 के पुराने खरीद दस्तावेजों के आधार पर दिखाया गया और कई प्रभावशाली लोगों को कम कीमत पर प्लॉट आवंटित किए गए।
वर्ष 2019 में जब कॉलोनी के नियमन का मामला सामने आया, तो जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने एनओसी मांगी, लेकिन हाउसिंग बोर्ड ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि जमीन पर पर्याप्त निर्माण नहीं हुआ है, इसलिए नियमन संभव नहीं है। इसके बाद सोसाइटी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामला एसीबी को भेज दिया गया। यह मामला शहर में अवैध अतिक्रमण और भू-माफिया गतिविधियों पर प्रशासन की सख्ती को दर्शाता है, वहीं स्थानीय स्तर पर विरोध के कारण कार्रवाई चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।