



दिल्ली। संसद में महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए गए, जिसके साथ ही सदन में तीखी बहस और विरोध शुरू हो गया। नारी शक्ति वंदन अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर विपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
सबसे पहले केसी वेणुगोपाल ने इन बिलों का विरोध करते हुए कहा कि सरकार संविधान की मूल भावना से छेड़छाड़ कर रही है और इसे “हाईजैक” करने का प्रयास कर रही है। इसके बाद धर्मेंद्र यादव ने मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण में शामिल करने की मांग उठाई और कहा कि उनके बिना यह कानून अधूरा है।
इस पर जवाब देते हुए अमित शाह ने स्पष्ट किया कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना असंवैधानिक है और इस पर कोई विचार नहीं किया जा सकता। वहीं अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि आधी आबादी के आरक्षण में मुस्लिम महिलाओं की हिस्सेदारी पर सरकार की क्या नीति है। इस पर अमित शाह ने तंज कसते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी चाहे तो अपने स्तर पर मुस्लिम महिलाओं को टिकट दे सकती है, इसमें सरकार को कोई आपत्ति नहीं है।
प्रस्तावित संशोधन के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें निर्धारित की जा सकती हैं। कुल सीटों में से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी और परिसीमन प्रक्रिया के जरिए इनकी अंतिम संख्या तय की जाएगी।
बिलों को पुनर्स्थापित करने के लिए पहले ध्वनि मत से पारित कराने का प्रयास किया गया, लेकिन विपक्ष के मत विभाजन की मांग पर वोटिंग कराई गई। इस दौरान 251 सांसदों ने पक्ष में और 185 सांसदों ने विपक्ष में मतदान किया, जिसके बाद बिलों को पुनर्स्थापित कर दिया गया। संसद में इस मुद्दे पर बहस अभी जारी रहने की संभावना है और आने वाले दिनों में यह विषय राजनीतिक रूप से और अधिक गरमाने के आसार हैं।