



जयपुर। सांगानेर क्षेत्र में टेक्सटाइल इकाइयों द्वारा फैलाए जा रहे जल प्रदूषण को लेकर राज्य सरकार सख्त रुख अपनाती नजर आ रही है। मुख्य सचिव वी श्रीनिवास की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में द्रव्यवती नदी में प्रदूषित जल छोड़ने वाली इकाइयों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में साफ किया गया कि जो इकाइयां ड्रेनेज सिस्टम से नहीं जुड़ी हैं या अवैध रूप से गंदा पानी बहा रही हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने जयपुर विकास प्राधिकरणऔर राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समेत संबंधित विभागों को संयुक्त सर्वे शुरू करने के निर्देश दिए, ताकि प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों की सटीक पहचान की जा सके। उन्होंने कहा कि नदियों में अपशिष्ट छोड़ने वाली डिफॉल्टर इकाइयों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) की कार्यप्रणाली को भी तुरंत दुरुस्त किया जाए।
बैठक में CETP की स्थिति पर भी गंभीर चिंता जताई गई। बताया गया कि 12.3 MLD क्षमता वाला प्लांट फिलहाल केवल 3.1 MLD पर ही काम कर रहा है और इसके कई महत्वपूर्ण हिस्से—जैसे मैकेनिकल बार स्क्रीन, स्लज थिकनर और MVR सिस्टम—अकार्यक्षम हैं। अब तक 892 में से 758 इकाइयों को CETP से जोड़ा जा चुका है, जबकि शेष इकाइयों को जोड़ने के लिए पम्पिंग स्टेशन-III और पाइपलाइन का कार्य 31 मई तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने SEPD को निर्देशित किया कि 30 अप्रैल तक CETP की सभी खामियों को दूर कर उसका सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही सभी इकाइयों को सहमति (Consent) के लिए आवेदन करने और सदस्यता प्रमाणपत्र जारी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
बैठक में PDCOR द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के सुझावों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार, प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष देबाशीष पृष्टि, प्रमुख शासन सचिव मंजू राजपाल, जेडीए आयुक्त सिद्धार्थ महाजन सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
यह कदम पर्यावरण संरक्षण और सांगानेर क्षेत्र में बढ़ते जल प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।