Thursday, 09 April 2026

शिक्षा व्यवस्था को अनुशासन और संस्कार से जोड़ने के लिए सरकार के दो फैसले: ‘निरर्थक’ नाम बदलने का मौका और स्कूलों में नशा करने वाले शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई


शिक्षा व्यवस्था को अनुशासन और संस्कार से जोड़ने के लिए सरकार के दो फैसले: ‘निरर्थक’ नाम बदलने का मौका और स्कूलों में नशा करने वाले शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई

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जयपुर। राज्य की शिक्षा व्यवस्था को अनुशासन और संस्कार से जोड़ने के लिए राजस्थान सरकार ने दो बड़े फैसले लेने की तैयारी की है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बुधवार को प्रेसवार्ता में घोषणा की कि एक ओर जहां विद्यार्थियों को ‘निरर्थक’ या मजाक का कारण बनने वाले नाम बदलने का अवसर दिया जाएगा, वहीं दूसरी ओर स्कूलों में नशा करने वाले शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि कई बार अभिभावक अनजाने में बच्चों के ऐसे नाम रख देते हैं, जो बड़े होने पर उनके लिए असहजता और उपहास का कारण बनते हैं। ऐसे विद्यार्थियों को अब अपना नाम और उपनाम बदलने का विकल्प दिया जाएगा, ताकि उनकी पहचान सकारात्मक और सम्मानजनक बन सके। इसके लिए शिक्षा विभाग करीब 2000 सार्थक नामों की सूची भी तैयार करेगा, जो प्रवेश के समय अभिभावकों को विकल्प के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार का दूसरा बड़ा फोकस स्कूलों में अनुशासन बनाए रखना है।शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने स्पष्ट किया कि धूम्रपान, गुटखा, तंबाकू या शराब का सेवन करने वाले शिक्षकों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कुछ शिक्षक नशे की हालत में स्कूल आते हैं या लगातार तंबाकू का सेवन करते हैं, जिसका बच्चों पर गलत प्रभाव पड़ता है। इस संबंध में सभी जिला अधिकारियों को ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार कर जल्द रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके साथ ही शिक्षा विभाग ने कई अन्य महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए हैं। सरकारी स्कूलों में टॉप करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान किया जाएगा और उनके होर्डिंग लगाकर अन्य छात्रों को प्रेरित किया जाएगा। पूर्व छात्रों के सम्मान समारोह आयोजित कर स्कूल से उनका जुड़ाव बढ़ाने की योजना भी बनाई गई है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि घुमंतू जातियों के बच्चों को अनिवार्य रूप से स्कूलों में प्रवेश दिया जाएगा और दस्तावेजों की कमी के कारण किसी भी बच्चे का एडमिशन नहीं रोका जाएगा। इन फैसलों को शिक्षा व्यवस्था में सुधार, अनुशासन और समावेशिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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