Wednesday, 08 April 2026

राजस्थान विधानसभा की चार वित्तीय समितियों का गठन, टीकाराम जूली बने PAC के सभापति


राजस्थान विधानसभा की चार वित्तीय समितियों का गठन, टीकाराम जूली बने PAC के सभापति

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जयपुर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विधानसभा की चार महत्वपूर्ण वित्तीय समितियों का गठन कर दिया है। इनमें जनलेखा समिति (PAC), प्राक्कलन समिति ‘क’, प्राक्कलन समिति ‘ख’ और राजकीय उपक्रम समिति शामिल हैं। इन सभी समितियों का कार्यकाल 31 मार्च 2027 तक रहेगा, जिसके बाद इनका पुनर्गठन किया जाएगा। इस निर्णय को विधानसभा की वित्तीय निगरानी और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

गठित समितियों में जनलेखा समिति (PAC) का सभापति नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूलीको बनाया गया है, जो परंपरा के अनुरूप विपक्ष को यह जिम्मेदारी देने का संकेत है। वहीं अन्य तीन समितियों में सत्तारूढ़ दल भाजपा के विधायकों को सभापति नियुक्त किया गया है। भाजपा विधायक संदीप शर्मा को प्राक्कलन समिति ‘क’, बाबू सिंह राठौड़ को प्राक्कलन समिति ‘ख’ और कालीचरण सराफ को राजकीय उपक्रम समिति का सभापति बनाया गया है।

इन समितियों में विभिन्न दलों के विधायकों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है, जिससे निर्णय प्रक्रिया में संतुलन और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो सके। जनलेखा समिति में अनिता भदेल, अर्जुन लाल जीनगर, प्रमोद जैन भाया, विश्वनाथ मेघवाल, अजय सिंह, रामकेश मीणा, चन्द्रभान सिंह चौहान, सुरेश धाकड़, रफीक खान, रोहित बोहरा, गुरवीर सिंह और गोपाल शर्मा को सदस्य बनाया गया है।

प्राक्कलन समिति ‘क’ में शांति धारीवाल, प्रताप सिंह सिंघवी, समाराम, हरेंद्र मिर्धा, छोटूसिंह, अर्जुन लाल, जीवाराम चौधरी, सुरेश मोदी, अमित चाचाण, मनोज कुमार (सादुलपुर) और विश्वराज सिंह मेवाड़ को शामिल किया गया है। वहीं प्राक्कलन समिति ‘ख’ में पुष्पेंद्र सिंह, शंकरसिंह रावत,गोविंद सिंह डोटासरा, हमीर सिंह भायल, पब्बाराम विश्नोई, समरजीत सिंह, मनोज कुमार (सुजानगढ़), अमीन कागजी, सुभाष गर्ग और अरुण चौधरी सदस्य बनाए गए हैं।

राजकीय उपक्रम समिति में दयाराम परमार, श्रवण कुमार, संजीव कुमार, हरिमोहन शर्मा, रीटा चौधरी, यूनुस खान, गोपाल लाल शर्मा, शत्रुघ्न गौतम, गोरधन, ललित मीना, अनिल कुमार शर्मा और शैलेश सिंह को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।

यह गठन विधानसभा की वित्तीय कार्यप्रणाली को मजबूत करने, सरकारी खर्चों की निगरानी और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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