Friday, 10 April 2026

राजस्थान में नई पहल: अब स्कूलों में जज पढ़ाएंगे कानून और साइबर सुरक्षा


राजस्थान में नई पहल: अब स्कूलों में जज पढ़ाएंगे कानून और साइबर सुरक्षा

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जयपुर। राजस्थान में विद्यार्थियों को विधिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक अनूठी पहल शुरू की जा रही है, जिसके तहत अब स्कूलों में शिक्षक ही नहीं बल्कि जज भी कक्षाएं लेंगे। ‘एम्पावरिंग राजस्थान यूथ: ए लीगल लिटरेसी इनिशिएटिव-2026’ के अंतर्गत राज्यभर के स्कूलों में छात्रों को कानून, अधिकारों और साइबर सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी। इस पहल के तहत राज्य विधिक सेवा प्राधिकर ने ‘ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे’ अभियान की शुरुआत की है, जिसकी शुरुआत अप्रैल माह के पहले मंगलवार से हो रही है।

इस अभियान के तहत प्रदेश के लगभग 1400 जज—सिविल जज से लेकर जिला न्यायाधीश स्तर तक—चयनित 1400 स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों को जागरूक करेंगे। खास तौर पर कक्षा 8 से 12 तक के छात्रों को साइबर बुलिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग जैसे विषयों पर व्यवहारिक जानकारी दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करना और उन्हें कानून के प्रति जागरूक बनाना है। इस कार्यक्रम की अवधारणा राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा की पहल पर तैयार की गई है, जबकि इसका औपचारिक शुभारंभ भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा फरवरी में आयोजित साइबर लॉ सम्मेलन के दौरान किया गया था।

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव हरिओम अत्री के अनुसार यह अभियान पूरे वर्ष चलेगा और प्रत्येक मंगलवार को अलग-अलग विषयों पर छात्रों को जानकारी दी जाएगी। साइबर सुरक्षा से शुरुआत करते हुए आगे चलकर संवैधानिक अधिकार, महिला और बाल अधिकार, विधिक सहायता, जिम्मेदार नागरिकता जैसे विषयों को शामिल किया जाएगा। इस अभियान के माध्यम से एक दिन में 4 लाख से अधिक छात्रों तक पहुंचने और सालभर में 52 हजार से ज्यादा स्कूलों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस पहल का एक विशेष आकर्षण ‘कोर्ट वाली दीदी शिकायत पेटी’ भी है, जिसे जज अपने साथ स्कूलों में लेकर जाएंगे। छात्र अपनी समस्याएं लिखकर इस पेटी में डाल सकेंगे, जिन पर विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम कार्रवाई कर समाधान निकालने का प्रयास करेगी। यह पहल न केवल छात्रों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाएगी, बल्कि उनमें जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना भी विकसित करेगी। राजस्थान में यह प्रयास शिक्षा और न्याय प्रणाली के समन्वय का एक सशक्त उदाहरण बनकर सामने आ रहा है।

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