



जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को लेकर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज भारत की विदेश नीति किस दिशा में जा रही है, यह स्पष्ट नहीं है और हालात चिंताजनक हैं।
दांडी मार्च समापन की शांति सभा को संबोधित करते हुए गहलोत ने कहा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई टिप्पणियां बेहद आपत्तिजनक हैं। उन्होंने कहा कि भले ही राजनीतिक विचारधारा अलग हो, लेकिन प्रधानमंत्री देश का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनकी बेइज्जती किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती। गहलोत ने कहा कि यदि किसी विदेशी नेता में यह कहने की हिम्मत होती है कि वह भारत के प्रधानमंत्री का राजनीतिक करियर खत्म कर सकता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है और इस पर देश को चुप नहीं रहना चाहिए।
गहलोत ने युवाओं को भी संबोधित करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को सही और गलत के बीच फर्क समझना और उस पर प्रतिक्रिया देना सीखना होगा। उन्होंने कहा कि देश में जो घटनाएं हो रही हैं, उन पर मौन रहना उचित नहीं है। यदि लोग गलत को गलत नहीं कहेंगे तो इसका नुकसान पूरे देश को उठाना पड़ेगा। उन्होंने राहुल गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वे संविधान बचाने की बात करते हैं, तो उसके पीछे ठोस कारण हैं और लोकतंत्र की स्थिति पर गंभीर चिंतन जरूरी है।
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में देश में लोकतंत्र के सामने चुनौतियां खड़ी हो रही हैं, जो सभी नागरिकों के लिए चिंता का विषय है। गहलोत ने युवाओं से आह्वान किया कि वे देश और दुनिया के हालात को समझें, विचार करें और आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहें।