



नई दिल्ली। सब इंस्पेक्टर भर्ती-2025 परीक्षा से ठीक दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) को बड़ी राहत देते हुए अपने पूर्व आदेश में संशोधन कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गुरुवार को दिया गया आदेश केवल याचिकाकर्ता सूरजमल मीणा तक ही सीमित रहेगा और इसे सभी अभ्यर्थियों पर लागू नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि एक व्यक्ति दूसरे के लिए राहत की मांग नहीं कर सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले यानी गुरुवार को आदेश दिया था कि एसआई भर्ती-2021 के सभी अभ्यर्थियों को 5 और 6 अप्रैल को होने वाली भर्ती परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाए। ये वे अभ्यर्थी थे जो आयु सीमा पार होने के कारण SI भर्ती-2025 के लिए आवेदन नहीं कर सके थे। हालांकि, शुक्रवार को आदेश में संशोधन के बाद अब यह राहत केवल संबंधित याचिकाकर्ता तक सीमित कर दी गई है, जिससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को झटका लगा है।
इस मामले में आरपीएससी ने सुप्रीम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर कर कहा था कि परीक्षा से ठीक पहले करीब 2.21 लाख अतिरिक्त अभ्यर्थियों के आवेदन स्वीकार करना और उन्हें एडमिट कार्ड जारी करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। आरपीएससी ने यह भी दलील दी कि 7.5 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को पहले ही एडमिट कार्ड जारी किए जा चुके हैं और परीक्षा केंद्रों पर सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। ऐसे में अंतिम समय पर इतने बड़े स्तर पर बदलाव करना व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
आरपीएससी की ओर से अधिवक्ता राजेश सिंह चौहान ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि आदेश को केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित रखा जाए। इस पर अवकाश के दिन सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने संशोधित आदेश जारी किया।
यह पूरा विवाद एसआई भर्ती-2021 से जुड़ा हुआ है। राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 28 अगस्त 2025 को पेपर लीक और गंभीर अनियमितताओं के आधार पर इस भर्ती को रद्द कर दिया था। साथ ही आगामी भर्ती में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट देने की सिफारिश भी की गई थी। हालांकि इस फैसले पर 8 सितंबर 2025 को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्टे लगा दिया था।
आरपीएससी ने इसके बाद आयु सीमा में कोई विशेष छूट नहीं दी, जिसके चलते प्रभावित अभ्यर्थियों ने पुनः न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट से मामला वापस आने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 19 जनवरी 2026 को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था, लेकिन अब तक उस पर निर्णय नहीं आया है। ऐसे में परीक्षा से ठीक पहले आए इस संशोधित आदेश ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता तो दी है, लेकिन हजारों अभ्यर्थियों की उम्मीदों को झटका भी पहुंचाया है।