Thursday, 02 April 2026

मालदा घटना पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, इलेक्शन ऑब्जर्वर्स को बंधक बनाए जाने पर जताई नाराजगी, वोटर लिस्ट विवाद ने बढ़ाया तनाव


मालदा घटना पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, इलेक्शन ऑब्जर्वर्स को बंधक बनाए जाने पर जताई नाराजगी, वोटर लिस्ट विवाद ने बढ़ाया तनाव

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नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में सात इलेक्शन ऑब्जर्वर्स को बंधक बनाए जाने की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए तीखी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अधिकारियों को करीब नौ घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया, उन्हें खाना-पानी तक नहीं दिया गया और यह घटना सुनियोजित व भड़काऊ प्रतीत होती है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि हालात चिंताजनक हैं। अदालत ने राज्य के गृह सचिव, डीजीपी और अन्य अधिकारियों से उनकी निष्क्रियता पर जवाब मांगा है।

घटना के अनुसार, सात न्यायिक अधिकारी बुधवार को मालदा के बीडीओ कार्यालय पहुंचे थे, जिनमें तीन महिला अधिकारी भी शामिल थीं। इसी दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के विरोध में हजारों लोगों ने कार्यालय को घेर लिया और अधिकारियों को अंदर ही रोक लिया। इसके बाद क्षेत्र में लगातार दूसरे दिन भी विरोध प्रदर्शन जारी है। गुरुवार को नारायणपुर स्थित बीएसएफ कैंप के सामने भी भीड़ जमा हो गई, जहां प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-12 को जाम कर टायर जलाकर विरोध जताया।

दरअसल, यह पूरा विवाद स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया से जुड़ा है। आरोप है कि मालदा सहित सीमावर्ती जिलों में बिना उचित नोटिस हजारों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जिले के 100 से अधिक गांव इस संशोधन से प्रभावित बताए जा रहे हैं। विभिन्न स्रोतों के अनुसार, कुछ गांवों में 50 से 200 तक और कालियाचक-2 के शिलालमपुर में 427 नाम हटाए गए। कुल मिलाकर 5% से 10% मतदाताओं के नाम ‘एडजुडिकेशन’ सूची में रखे गए थे, जिनमें से बड़ी संख्या को अंतिम सूची से हटा दिया गया।

नाम हटाने के पीछे दस्तावेजों में गड़बड़ी, लंबे समय से अनुपस्थिति और तकनीकी त्रुटियों को कारण बताया जा रहा है। वहीं इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। टीएमसी ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराते हुए कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा ने इसे पश्चिम बंगाल में ‘डर का माहौल’ बताते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के तहत 7.04 करोड़ मतदाताओं की सूची जारी की गई थी, जिसमें करीब 60 लाख नाम जांच के दायरे में रखे गए हैं। इस प्रक्रिया के लिए 705 न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त किया गया है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब इस पूरे मामले में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर कार्रवाई की दिशा तय होना अहम होगा।

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