



जयपुर। मानसरोवर स्थित वीटी रोड मेला ग्राउंड में चल रही शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को सरलता और आंतरिक भक्ति का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कथा सुनने आए हैं तो जहां जगह मिले वहीं बैठकर कथा का आनंद लें, स्थान का कोई महत्व नहीं है।
उन्होंने कहा कि कुर्सी, सोफा या जमीन—कहीं भी बैठने से कथा का फल समान ही मिलता है। फर्क सिर्फ इतना है कि कुर्सी से गिरने का डर होता है, जबकि जमीन से नहीं। जमीन कोई छीन नहीं सकता, इसलिए सरलता और संतोष के साथ कथा सुननी चाहिए।
प्रदीप मिश्रा ने बाहरी दिखावे पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि आज के समय में लोग बाहरी स्वरूप पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, लेकिन भगवान को रिझाने के लिए आंतरिक भक्ति और सच्चे भाव जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के पास धन-संपदा तो है, लेकिन मन की शांति की कमी है।
उन्होंने नारी सम्मान पर भी जोर देते हुए कहा कि घर की स्त्री का सम्मान करना चाहिए। भगवान शंकर भी अपनी पत्नी को उच्च स्थान देते हैं, इसलिए जो नारी का सम्मान करेगा, उसका जीवन भी ऊंचा होगा। कथा में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जिसके चलते पंडाल में भारी भीड़ देखने को मिल रही है। आयोजकों ने अंतिम दिन के लिए कथा के समय में बदलाव किया है। अब समापन दिवस पर कथा सुबह 8 बजे से 11 बजे तक आयोजित होगी।