



जयपुर। आज जिसे हम 'प्रगतिशील शिक्षा' मान रहे हैं, वास्तव में वह मनुष्य को उसकी जड़ों से काटकर एक मशीन का पुर्जा बनाने की प्रक्रिया मात्र है। अच्छी शिक्षा की विशेषता यह है कि वह राजनीति से मुक्त होनी चाहिए तभी शिक्षा के उद्देश्य की पूर्ति हो पाएगी। हिंदी के विद्वान और विख्यात शिक्षाविद डॉ राघव प्रकाश ने कहा कि इस दुनिया को राजनीति से नहीं बल्कि शिक्षा से ही बदला जा सकता है।
मानसरोवर स्थित आचार्य हस्ती ऑडिटोरियम में डॉ. राघव प्रकाश और प्रो. सविता पाईवाल द्वारा लिखित पुस्तक 'सृजनात्मक शिक्षा' का विमोचन हुआ। इस अवसर पर राजस्थान लोकसेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर बीएम शर्मा, जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर और यूपीएससी के पूर्व सदस्य प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल, वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा के पूर्व कुलपति प्रोफेसर नरेश दाधीच, हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर ओम थानवी, राजस्थान साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर हेतु भारद्वाज, दूरदर्शन के पूर्व अतिरिक्त निदेशक नंद भारद्वाज, राजकमल प्रकाशन के संचालक अशोक माहेश्वरी, शिक्षाविद और लेखक राजेंद्र मोहन शर्मा, पूर्व आईएएस जगरूप यादव, वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र छाबड़ा और प्रख्यात कवि संपत सरल सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
अपनी पुस्तक पर चर्चा करते हुए डॉ. राघव प्रकाश ने कहा कि बदलते सामाजिक एवं शैक्षणिक परिवेश में सीखने सिखाने के नवाचारों, विधियों एवं प्रणालियों के विश्वस्तरीय शोधों के आधार पर इस पुस्तक का लेखन किया गया। शिक्षा बदलो, दुनिया बदलो के उद्देश्य से इस पुस्तक को लिखा गया है। प्रो. सविता पाईवाल ने कहा कि दुनिया का हर बालक शिक्षा से होकर गुजरता है। इसलिए सभी स्कूल, सभी कॉलेज और सभी विश्वविद्यालय यह तय कर लें कि हमें हमारे बच्चों को अच्छी तरह से पढ़ाना है तो वे बड़ा बदलाव ला सकते हैं। उनमें राजनीतिक विवेक ला सकते हैं ताकि वे प्रदेश के विकास की परियोजनाएं तैयार कर सकें। आर्थिक विवेक लाया सकते हैं ताकि नागरिक अच्छा बिजनेस कर सके। पाईवाल का कहना था कि अच्छी शिक्षा से ही बालक बड़ा होकर संस्कारित और गुणवान नागरिक बन सकता है। इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं है।