



राजस्थान हाईकोर्ट ने कोरोना काल में ड्यूटी के दौरान संक्रमित होकर मृत सरकारी कर्मचारी के आश्रितों को मुआवजा नहीं देने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए प्रमुख राजस्व सचिव, प्रमुख वित्त सचिव और टोंक कलेक्टर सहित संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश विजय कुमार भारतीय की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए पारित किए।
याचिका में अधिवक्ता लक्ष्मीकांत शर्मा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता की मां गाती देवी टोंक तहसील कार्यालय में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत थीं और कोरोना काल के दौरान उनकी ड्यूटी कंट्रोल रूम में लगाई गई थी। इसी दौरान वे कोरोना संक्रमित हो गईं और 24 नवंबर 2020 को अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य के वित्त विभाग ने 11 अप्रैल 2020 को आदेश जारी कर स्पष्ट किया था कि ड्यूटी के दौरान संक्रमित होकर मृत्यु होने पर कर्मचारी के आश्रितों को 50 लाख रुपये की अनुग्रह राशि तथा पेंशन नियमों के तहत 20 लाख रुपये सहित कुल 70 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा। इसके बावजूद याचिकाकर्ता द्वारा कई बार आवेदन करने और जिला प्रशासन के निर्देश पर उपखंड अधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा 14 मई को मुआवजा देने की सिफारिश किए जाने के बाद भी अब तक राशि का भुगतान नहीं किया गया। इस पर अदालत ने गंभीरता दिखाते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है और मामले में आगे की सुनवाई निर्धारित की है।