



जयपुर। राजस्थान सरकार ने प्रदेश की सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए अगले पांच वर्षों में ₹12 हजार 335 करोड़ खर्च करने की योजना बनाई है। इस संबंध में मुख्य सचिव ने हाईकोर्ट में विस्तृत शपथ पत्र पेश करते हुए स्कूल भवनों की मरम्मत, नए निर्माण और आधारभूत सुविधाओं के विकास का रोडमैप प्रस्तुत किया।
यह रोडमैप हाईकोर्ट की उस सख्ती के बाद सामने आया है, जब जस्टिस महेंद्र गोयल और जस्टिस अशोक जैन की खंडपीठ ने शिक्षा विभाग के पहले प्रस्तुत एक्शन प्लान पर असंतोष जताया था और सरकार से विस्तृत योजना मांगी थी। झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद कोर्ट इस मामले में स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। मामले की अगली सुनवाई 28 मार्च को निर्धारित की गई है।
शपथ पत्र के अनुसार, प्रदेश के 3 हजार 587 जर्जर स्कूलों के लिए ₹ 2 हजार 487 करोड़ की लागत से नए भवन बनाए जाएंगे। इसके अलावा 22 हजार 589 स्कूल भवनों की मरम्मत पर ₹ 1 हजार 129 करोड़ खर्च किए जाएंगे। वहीं 83 हजार 783 जर्जर कक्षाओं के स्थान पर ₹8 हजार 378 करोड़ की लागत से नए क्लासरूम बनाए जाएंगे।
सरकार ने स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए भी योजना तैयार की है। इसके तहत 13 हजार 616 जर्जर शौचालयों के निर्माण और मरम्मत के लिए ₹340 करोड़ खर्च किए जाएंगे। आंकड़ों के अनुसार, नए स्कूल भवनों का सबसे अधिक निर्माण उदयपुर (455), झालावाड़ (309), प्रतापगढ़ (270), बांसवाड़ा (203), डूंगरपुर (201) और जयपुर (134) जिलों में किया जाएगा।
सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि इस बड़े बजट के लिए विभिन्न स्रोतों से धन जुटाया जाएगा। इसमें सर्व शिक्षा अभियान से करीब ₹ 2 हजार 500 करोड़, जिला खनिज प्रतिष्ठान न्यास (DMFT) से ₹1 हजार करोड़, सांसद और विधायक निधि से ₹1 हजार करोड़, विभिन्न योजनाओं और जनजातीय क्षेत्र विकास निधि से ₹ 500 करोड़, एसडीआरएफ और सीएसआर से ₹ 750-750 करोड़, वीबीजीआरएएमजी निधि से ₹ 2 हजार करोड़, राज्य शिक्षा बजट से ₹1 हजार 500 करोड़ और विश्व बैंक व नाबार्ड से ₹ 2 हजार 500 करोड़ शामिल हैं।
हाईकोर्ट ने इस विस्तृत योजना पर सभी पक्षों से राय मांगी है। अगली सुनवाई में कोर्ट इस योजना के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक समिति के गठन पर भी विचार कर सकता है। यह योजना प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।