



जोधपुर। कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर का सप्तम दीक्षांत समारोह शुक्रवार को आयोजित हुआ, जिसमें राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि यह जीवन के नए अध्याय की शुरुआत का महत्वपूर्ण क्षण है। उन्होंने भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि दीक्षांत को ‘समावर्तन संस्कार’ के रूप में देखा जाता था, जिसमें विद्यार्थियों को समाज के प्रति समर्पित जीवन जीने की प्रेरणा दी जाती है।
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे विश्वविद्यालय में अर्जित ज्ञान को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाएं और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने शिक्षा को “जीवन का आलोक पथ” बताते हुए कहा कि यह व्यक्ति को स्वयं के साथ-साथ समाज और विश्व को भी प्रकाशित करने की क्षमता प्रदान करती है।
उन्होंने कृषि को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए विश्वविद्यालयों से नवाचार आधारित शोध को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यपाल ने कहा कि आधुनिक कृषि में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों का उपयोग आवश्यक है, जिससे किसानों की उत्पादकता और आय में वृद्धि हो सके। उन्होंने ‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान और जय अनुसंधान’ के मंत्र को अपनाने का आह्वान भी किया।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। जल संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि “पानी की बचत ही उसका उत्पादन है।” उन्होंने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता बताई।
समारोह में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहां से जिम्मेदारियों का नया दौर शुरू होता है। उन्होंने युवाओं से अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग राष्ट्र के विकास में करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने सावंत कुआं स्थित डेयरी एवं खाद प्रौद्योगिकी महाविद्यालय तथा प्रौद्योगिकी एवं कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय के छात्रावासों का लोकार्पण किया और विश्वविद्यालय के विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन भी किया।
समारोह में कुल 403 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं, जबकि 15 विद्यार्थियों को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। यह समारोह विद्यार्थियों के लिए नए जीवन की शुरुआत के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के प्रति उनके दायित्वों की याद दिलाने वाला प्रेरणादायक अवसर रहा।