



जयपुर। राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार और चुनाव आयोग जानबूझकर चुनाव प्रक्रिया में देरी कर रहे हैं, जो हाईकोर्ट के आदेश की सीधी अवमानना है।
याचिका में कहा गया है कि राज्य चुनाव आयोग द्वारा निकाय चुनाव के लिए मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का जो कार्यक्रम जारी किया गया है, उसके अनुसार अंतिम मतदाता सूची 22 अप्रैल तक प्रकाशित की जाएगी। ऐसे में स्पष्ट है कि चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक कराना संभव नहीं होगा, जबकि हाईकोर्ट ने चुनाव इसी समय सीमा में कराने के निर्देश दिए थे।
संयम लोढ़ा ने यह भी उल्लेख किया है कि अवमानना याचिका दायर करने से पहले उन्होंने अधिवक्ता पुनीत सिंघवी के माध्यम से राज्य सरकार और चुनाव आयोग को लीगल नोटिस भेजा था। नोटिस में मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम को संशोधित करने और 15 अप्रैल की समय सीमा के अनुरूप पुनः निर्धारित करने का अनुरोध किया गया था। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो अवमानना याचिका दायर की जाएगी।
गौरतलब है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव 15 अप्रैल 2026 तक कराए जाएं। साथ ही परिसीमन की प्रक्रिया 31 दिसंबर 2025 तक पूरी करने के आदेश भी दिए गए थे। इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान भी उच्चतम न्यायालय ने चुनाव समय सीमा को बरकरार रखने की बात कही थी।
अब इस अवमानना याचिका के जरिए यह मुद्दा एक बार फिर न्यायालय के समक्ष आ गया है, जिससे राज्य में चुनावी प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यवाही को लेकर नई बहस छिड़ने की संभावना है।