



हिंडौन सिटी स्थित कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के निवास पर गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें समाज के प्रबुद्धजन और पदाधिकारियों ने भाग लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष जताया। बैठक में विशेष रूप से 8 जून 2025 को सरकार और समिति के बीच हुए समझौते के क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। पदाधिकारियों ने बताया कि समझौते के लगभग 10 महीने बीत जाने के बावजूद केवल एक बिंदु—शहीद रूपनारायण के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति—पर ही अमल हुआ है, जबकि अन्य मांगें अब तक लंबित हैं। समाज ने चेतावनी दी कि यदि आगामी शहीद दिवस तक ठोस प्रगति नहीं हुई, तो कड़े निर्णय लिए जाएंगे।
बैठक में गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए। समिति ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 से 2026 के बीच आरक्षण से जुड़े मामलों का निस्तारण नहीं किया गया है। नवंबर 2023 में जिन 42 मुकदमों को निस्तारित बताया गया था, उनके एफआईआर नंबर तक सार्वजनिक नहीं किए गए। इसके अलावा करौली कोतवाली (2008) और प्रकरण संख्या 4/2016 में संपत्ति कुर्की के आदेश को लेकर भी नाराजगी जताई गई। समिति का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय और गृह राज्यमंत्री को डेढ़ वर्ष पहले अवगत कराने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जो संघर्षरत साथियों के साथ विश्वासघात है।
बैठक में आगामी रणनीति को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए। सवाई माधोपुर के कुशालीदर्रा स्थित शहीद स्थल पर समाज स्वयं शहीदों की मूर्तियों का अनावरण करेगा। साथ ही, टीएसपी क्षेत्रों में एमबीसी आरक्षण लागू कराने के लिए आंदोलन को नई दिशा देने का निर्णय लिया गया। आरजेएस भर्ती में बैकलॉग लागू न होने पर सरकार से जवाब भी मांगा गया। इसके अलावा देवनारायण योजना की समीक्षा बैठकों में अब तथ्यों के साथ सख्त पक्ष रखने का निर्णय लिया गया।
बैठक में विजय किरोड़ी सिंह बैंसला, परमाल सिंह खटाणा (एएसपी), रामराज भोपर, कप्तान प्रतापसिंह घांटर, रामावतार बडिया, मोहर सिंह माल, एडवोकेट आनंद पटेल, एडवोकेट वीरेंद्र सिंह, महेंद्र सिंह बयाना, सूबेदार जनक सिंह और जीतू तिघरिया सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।